Breaking
- Sports News: Asian Games 2026 के पदकवीरों से PM मोदी ने की मुलाकात, महिला खिल...
- Raipur News: हल्दी बीज वितरण में अनियमितता, कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने दिए...
- बाढ़ से बर्बाद किसान सड़क पर उतरे, कलेक्ट्रेट का घेराव कर दी ट्रैक्टरों से जग...
- VB-G RAM G के तकनीकी सहायकों की राज्य स्तरीय हड़ताल, नियमितीकरण की मांग को ले...
- Raigarh News: किसानों की खुशहाली और समृद्धि हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकत...
- Dantewada News: नक्सलवाद से मिले घावों पर मरहम लगाकर हर पीड़ित को सम्मानपूर्ण...
- Narayanpur News: वनांचल में उम्मीदों का जल, नारायणपुर के दूरस्थ गांव बागझर मे...
- Raipur News: गन्ना मूल्य में छत्तीसगढ़ देश में नंबर वन, किसानों को अब 425 रुपय...
- रायपुर में बसों के रूटवार स्टॉप तय, मनमाने ठहराव पर लगेगी रोक; भाठागांव से सं...
- छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह होंगे शामिल, माओवाद ह...
GPM Irrigation Growth: 25 वर्षों में छह गुना बढ़ी सिंचाई क्षमता, 4,458 से 25,936 हेक्टेयर तक पहुंचा दायरा

रायपुर, 17 सितंबर 2026। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में जल संसाधन विभाग की 25 वर्षों की विकास यात्रा ने सिंचाई अधोसंरचना के विस्तार को नई दिशा दी है। राज्य गठन के समय जिले में जहां 4,458 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की क्षमता थी, वहीं वर्ष 2026 में यह बढ़कर 25,936 हेक्टेयर हो गई है। यानी 25 वर्षों में सिंचाई क्षमता में 21,476 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है और यह क्षमता शुरुआती स्तर की तुलना में छह गुना से अधिक बढ़ी है।

राज्य गठन के समय सीमित थीं सिंचाई सुविधाएं
1 नवंबर 2000 से पहले जिले में कुल 28 जल संसाधन परियोजनाएं निर्मित थीं। इनमें 17 जलाशय, 4 व्यपवर्तन योजनाएं, 2 स्टॉप डेम और 5 एनीकट शामिल थे। इनसे सिर्फ 4,458 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो पाती थी। सीमित सिंचाई साधनों के कारण जिले की कृषि काफी हद तक मानसूनी बारिश पर निर्भर थी।
25 वर्षों में बनीं 57 नई जल संसाधन परियोजनाएं
राज्य गठन के बाद जल संसाधन विभाग ने सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण पर चरणबद्ध तरीके से काम किया। पिछले 25 वर्षों में जिले में 57 नई जल संसाधन परियोजनाओं का निर्माण पूरा किया गया। पुरानी 28 परियोजनाओं को मिलाकर जिले में अब कुल 85 जल संसाधन योजनाओं का आधार तैयार हो चुका है। नहरों के जीर्णोद्धार और विस्तार के साथ दूर-दराज के खेतों तक पानी पहुंचाने पर जोर दिया गया। कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई के लिए माइक्रो और लिफ्ट इरिगेशन, सोलर पंप तथा डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया गया।
सिंचाई विस्तार से कृषि गतिविधियों को मिला आधार
सिंचाई क्षमता बढ़ने से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ी हैं। खेतों में पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को स्थानीय स्तर पर कृषि कार्य आगे बढ़ाने और बहुफसलीय खेती की दिशा में काम करने का अवसर मिला है। सिंचाई के बढ़ते दायरे से कृषि उत्पादन, हरियाली और ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों को भी आधार मिलने की बात कही गई है। जिले की प्रमुख जल संरचनाओं में देवरगांव का मलनिया जलाशय, आंदुल का जोगीडोंगरी जलाशय और बनझोरका का एनीकट शामिल हैं।
आधुनिक तकनीक और जल संरक्षण पर भी जोर
GPM जिले में सिंचाई विस्तार के साथ जल संरक्षण और बेहतर जल प्रबंधन पर भी काम किया जा रहा है। माइक्रो एवं लिफ्ट इरिगेशन, सोलर पंप और डिजिटल तकनीक के माध्यम से जल के उपयोग एवं वितरण को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। नदियों के संरक्षण, एनीकट निर्माण और भू-जल संवर्धन जैसी गतिविधियां भी जल उपलब्धता मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। वहीं निर्माणाधीन नई सिंचाई योजनाओं के पूरा होने के बाद जिले की सिंचाई क्षमता में और वृद्धि होने की उम्मीद है। विभाग की 25 वर्षों की यह यात्रा जल संरचनाओं के विस्तार के साथ कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में हुए बदलाव को दर्शाती है।







