छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का एक नया और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक युवक को सरकारी डॉक्टर की कुर्सी दिलाने का झांसा देकर जालसाज ने 20,00,000 रुपये (20 लाख) की मोटी रकम ऐंठ ली। पीड़ित को भरोसा दिलाने के लिए आरोपी ने बड़ी चतुराई से जाल बुना, लेकिन अंततः उसकी चालाकी ने ही उसे जेल की सलाखों के पीछे पहुँचा दिया।
'बिना पे ऑप्शन' वाले चेक से दिया चकमा
ठगी की इस वारदात में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब आरोपी ने पैसे के बदले पीड़ित को सुरक्षा के तौर पर एक चेक थमाया। आरोपी ने जानबूझकर ऐसा चेक दिया जिसमें 'पे' (Pay) ऑप्शन के साथ छेड़छाड़ की गई थी या उसे अधूरा छोड़ा गया था। जब पीड़ित ने इस चेक को बैंक में लगाया और वह बाउंस हो गया, तब जाकर उसे एहसास हुआ कि वह एक सोची-समझी साजिश का शिकार हो चुका है।
नौकरी का झांसा और ऊंची पहुंच का दावा
जांच में पता चला है कि आरोपी ने खुद को रसूखदार बताते हुए स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों से अपनी पहचान होने का दावा किया था। उसने पीड़ित को विश्वास दिलाया था कि वह बिना किसी बाधा के सीधे सरकारी पद पर नियुक्ति करवा देगा। बेरोजगारों की मजबूरी का फायदा उठाकर आरोपी ने किस्तों में लाखों रुपये वसूले, लेकिन जब जॉइनिंग लेटर नहीं मिला, तो राज फाश हो गया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई, आरोपी गिरफ्तार
चेक बाउंस होने और ठगी की पुष्टि होने के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर घेराबंदी की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के पास से ठगी से जुड़े कुछ दस्तावेज और बैंक ट्रांजेक्शन की जानकारी भी हाथ लगी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इस गिरोह में कुछ और लोग भी शामिल हैं।
सजगता ही बचाव का एकमात्र रास्ता
यह मामला एक बार फिर उन लोगों के लिए चेतावनी है जो 'शॉर्टकट' से सरकारी नौकरी पाने की कोशिश करते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी पदों पर भर्ती केवल निर्धारित प्रक्रिया और परीक्षाओं के माध्यम से ही होती है। किसी भी व्यक्ति को मोटी रकम देकर नौकरी पाने का लालच न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाता है, बल्कि कानूनी पचड़ों में भी डाल सकता है।








