मिडिल ईस्ट में इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। युद्ध के इस माहौल में निवेशकों के बीच 'सेफ हेवन' (सुरक्षित निवेश) के रूप में सोने की डिमांड में जबरदस्त उछाल आया है। पिछले 4 दिनों के भीतर ही सोने की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। बाजार जानकारों के अनुसार, जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध जैसी स्थिति बनती है, शेयर बाजार में गिरावट आती है और लोग अपना पैसा सोने में निवेश करना सुरक्षित समझते हैं, जिसके कारण घरेलू बाजार में भी कीमतें बेकाबू हो रही हैं।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित देशभर के सर्राफा बाजारों में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। रायपुर में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,72,000 प्रति 10 ग्राम के पार निकल गया है, वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत भी ₹1,58,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास बनी हुई है। महज कुछ ही दिनों पहले सोना ₹1.60 लाख के स्तर पर था, लेकिन युद्ध की खबरों ने इसमें ₹8,000 से ₹10,000 तक की वृद्धि कर दी है। चांदी की कीमतों में भी इसी तरह की तेजी देखी जा रही है, जो ₹2.90 लाख प्रति किलो के करीब ट्रेड कर रही है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि इजरायल और ईरान के बीच युद्ध लंबा खिंचता है या इसमें अमेरिका की सीधी भागीदारी बढ़ती है, तो सोने के दाम जल्द ही ₹1.80 लाख के स्तर को भी पार कर सकते हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी इस तेजी को हवा दी है। सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि शादियों का सीजन होने के बावजूद आम खरीदार अब ऊंचे दामों के कारण खरीदारी से बच रहे हैं, जबकि निवेशक भारी मात्रा में सोने की ईंटें और सिक्के खरीद रहे हैं।
सोने के साथ-साथ चांदी में भी इंडस्ट्रियल डिमांड और युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने का असर दिख रहा है। छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों जैसे बिलासपुर, दुर्ग और भिलाई में भी सोने के दामों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि इस समय बाजार में काफी अस्थिरता है, इसलिए छोटे निवेशकों को बाजार की चाल समझकर ही निवेश करना चाहिए। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें मिडिल ईस्ट के हालातों पर टिकी हैं, क्योंकि वहां से आने वाली हर एक खबर सोने की कीमतों की दिशा तय कर रही है।








