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सोने-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल: सोना ₹1.36 लाख के पार, चांदी ने ₹2.40 लाख का स्तर छुआ; निवेशक गदगद...

National 02 January 2026

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भारतीय सर्राफा बाजार में साल 2026 की शुरुआत एक जबरदस्त धमाके के साथ हुई है। वैश्विक अनिश्चितताओं और मांग में भारी वृद्धि के कारण सोने की कीमतों में 954 रुपये प्रति 10 ग्राम की बड़ी तेजी दर्ज की गई, जिससे 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव 1,36,700 रुपये के स्तर को पार कर गया है। वहीं, चांदी ने तो मानो आसमान ही छू लिया है; एक ही दिन में 5,656 रुपये प्रति किलो की रिकॉर्ड बढ़त के साथ यह 2,34,900 रुपये (बिना टैक्स) और जीएसटी सहित करीब 2.41 लाख रुपये तक पहुँच गई है।

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कीमतों में इस बेतहाशा बढ़ोतरी के पीछे प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की भारी मांग और डॉलर की तुलना में रुपये का उतार-चढ़ाव माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं ने निवेशकों को सोने-चांदी की सुरक्षित खरीदारी की ओर मोड़ा है। इस तेजी ने मध्यम वर्ग और शादी-ब्याह के सीजन के लिए खरीदारी करने वालों की चिंता बढ़ा दी है, जबकि पुराने निवेशकों को बंपर रिटर्न मिल रहा है।

चांदी की कीमतों में आई उछाल विशेष रूप से चौंकाने वाली है। पिछले एक साल में चांदी ने लगभग 167% का रिटर्न देकर शेयर बाजार को भी पीछे छोड़ दिया है। औद्योगिक मांग, विशेष रूप से सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों में चांदी के बढ़ते उपयोग ने इसकी कमी पैदा कर दी है, जिससे कीमतें लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं। कारोबारियों का अनुमान है कि यदि यही ट्रेंड जारी रहा, तो चांदी जल्द ही ढाई लाख के आंकड़े को भी पार कर सकती है।

देश के प्रमुख महानगरों में भी भाव सातवें आसमान पर हैं। दिल्ली में 24 कैरेट सोना 1,36,620 रुपये, मुंबई में 1,36,850 रुपये और चेन्नई में 1,37,270 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर ट्रेड कर रहा है। स्थानीय ज्वैलर्स का कहना है कि कीमतों में इतनी तेजी के बावजूद लोग निवेश के लिहाज से सोने के सिक्के और बार खरीदना पसंद कर रहे हैं, हालांकि गहनों की डिमांड पर ऊंची कीमतों का असर देखा जा रहा है।

बाजार विशेषज्ञों की सलाह है कि कीमतों में इस तरह के 'शार्प रन-अप' के बाद कुछ सुधार (Correction) भी आ सकता है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोना और चांदी अभी भी पसंदीदा विकल्प बने हुए हैं। आने वाले दिनों में केंद्रीय बैंकों की नीतियों और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर बाजार की नजर रहेगी, जो यह तय करेंगे कि कीमतों का यह नया शिखर स्थिर रहता है या इसमें और वृद्धि होती है।

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