सराफा बाजार में पिछले 5 दिनों से जारी तेजी पर मंगलवार को ब्रेक लग गया। निवेशकों की मुनाफावसूली और वैश्विक दबाव के कारण चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। एक ही दिन में चांदी ₹4,000 टूटकर ₹2.31 लाख प्रति किलोग्राम (MCX औसत) के करीब पहुंच गई। इससे पहले चांदी ने ₹2.50 लाख के ऐतिहासिक स्तर को छुआ था, लेकिन ऊंचे स्तरों पर टिक नहीं पाने के कारण इसमें बड़ी गिरावट आई।
चांदी के साथ-साथ सोने की चमक भी आज फीकी रही। 24 कैरेट सोने की कीमत में ₹2,119 प्रति 10 ग्राम की बड़ी गिरावट देखी गई, जिसके बाद यह ₹1.34 लाख के स्तर पर आ गया। बाजार जानकारों का कहना है कि नए साल से पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर इंडेक्स में मजबूती और डॉलर के मुकाबले रुपये में सुधार की संभावनाओं ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है। घरेलू बाजार में इस गिरावट से उन खरीदारों को राहत मिली है जो शादियों के सीजन के लिए खरीदारी की योजना बना रहे थे।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में चांदी ने रिकॉर्ड तोड़ रिटर्न दिया है, जिसके कारण ट्रेडर्स ने बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग की है। दिसंबर के महीने में ही चांदी करीब 35% तक उछल चुकी थी। वैश्विक स्तर पर औद्योगिक मांग और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियों में होने वाले संभावित बदलावों का असर सीधे तौर पर भारत में सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ रहा है।
प्रमुख शहरों की बात करें तो दिल्ली, मुंबई और इंदौर जैसे बड़े केंद्रों में भाव में ₹2,000 से ₹4,500 तक का उतार-चढ़ाव देखा गया। ज्वेलर्स का मानना है कि इस गिरावट के बाद बाजार में स्थिरता आ सकती है। हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट खरीदारी का एक अच्छा अवसर मानी जा रही है क्योंकि साल 2026 के लिए भी गोल्ड और सिल्वर का आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है।
निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की अस्थिरता को देखते हुए एकमुश्त निवेश के बजाय टुकड़ों में खरीदारी करें। सोने और चांदी की कीमतों में आए इस 'क्रैश' ने बाजार के सेंटिमेंट को थोड़ा सुस्त जरूर किया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के तौर पर इन धातुओं की मांग फिर से जोर पकड़ सकती है।








