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नक्सलवाद के साये से बाहर निकला गोगुण्डा, 'हरे सोने' की खरीदी के साथ शुरू हुआ विकास का नया अध्याय

Chhattisgarh RRT News Desk 01 May 2026

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CG News- छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड के अंतिम छोर पर स्थित गोगुण्डा क्षेत्र अब हिंसा और बंदूकों की गूंज से मुक्त हो रहा है। दशकों तक नक्सलवाद के दंश को झेलने के बाद, यहाँ विकास की नई शुरुआत हुई है। हाल ही में क्षेत्र में 'हरा सोना' यानी तेंदूपत्ता की खरीदी सुचारू रूप से शुरू की गई है, जो स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य आधार है। सुरक्षा बलों की तैनाती और शासन की योजनाओं की पहुंच से ग्रामीणों के मन से भय कम हुआ है और वे अब मुख्यधारा की गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं।

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प्रशासन ने केवल आर्थिक मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक मनोरंजन के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव लाने की पहल की है। गोगुण्डा जैसे सुदूर क्षेत्रों में अब मनोरंजन कक्ष तैयार किए गए हैं, जहाँ ग्रामीणों के लिए गीत-संगीत और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन होगा। जिन गांवों में कभी सन्नाटा पसरा रहता था, वहां अब विकास कार्यों की आहट और खुशहाली के स्वर सुनाई दे रहे हैं। यह बदलाव बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे 'नियत नेल्लांनार' (आपका अच्छा गांव) जैसी योजनाओं का परिणाम माना जा रहा है।

सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। तेंदूपत्ता संग्रहण केंद्रों पर चहल-पहल बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है, जिससे युवाओं का रुझान नक्सलवाद की ओर जाने के बजाय रोजगार की ओर बढ़ रहा है। सुकमा का यह बदलाव बस्तर के अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए एक मिसाल पेश कर रहा है कि शांति और संवाद के माध्यम से विकास की नई गाथा लिखी जा सकती है।

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