छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU) से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक छात्र ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कथित तानाशाही और परीक्षा संबंधी समस्याओं से तंग आकर प्रशासनिक भवन के सामने खुद पर मिट्टी का तेल (केरोसिन) डालकर आत्मदाह करने का प्रयास किया। घटना के वक्त वहां भारी संख्या में छात्र मौजूद थे, जिन्होंने तत्परता दिखाते हुए छात्र को आग लगाने से रोका और एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया। इस घटना के बाद से पूरे कैंपस में तनाव का माहौल बना हुआ है।
जानकारी के मुताबिक, छात्र पिछले काफी समय से अपनी शैक्षणिक समस्याओं और परीक्षा परिणामों को लेकर विभाग के चक्कर काट रहा था। आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से उसकी समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया, जिससे क्षुब्ध होकर उसने यह आत्मघाती कदम उठाने का फैसला किया। छात्र के इस कदम ने विश्वविद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली और छात्र शिकायतों के निवारण तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों और अन्य छात्रों ने उसे सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया।
इस घटना के तुरंत बाद विश्वविद्यालय के अन्य छात्र आक्रोशित हो गए और प्रशासनिक भवन के सामने धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में छात्रों की समस्याओं को अनसुना किया जाता है और प्रबंधन का रवैया दमनकारी है। छात्रों ने कुलपति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मांग की कि पीड़ित छात्र की समस्याओं का तत्काल निराकरण किया जाए। इस दौरान छात्रों और सुरक्षा गार्डों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली, जिसके बाद कैंपस में पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने आनन-फानन में बैठक बुलाई है। प्रशासन का कहना है कि छात्र के आरोपों की जांच की जा रही है और किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि, छात्र नेताओं का आरोप है कि प्रशासन केवल आश्वासन देता है और जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि छात्र हित में जल्द निर्णय नहीं लिए गए, तो यह आंदोलन और उग्र रूप धारण करेगा।
बिलासपुर पुलिस भी इस मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस अधिकारियों ने छात्र से बातचीत की है और उसे शांत करने की कोशिश की जा रही है। कैंपस में स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। छात्र समुदाय ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी इस घटना की निंदा की है और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि विश्वविद्यालय के भीतर शैक्षणिक माहौल को सुधारा जा सके और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य एवं हितों की रक्षा हो सके।








