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Viral News: गरियाबंद के आसमान में दिखी 'उड़ने वाली गिलहरी', टाइगर रिजर्व का दुर्लभ नजारा हुआ वायरल; देखें अनोखी तस्वीर

Chhattisgarh 05 April 2026 (45)

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छत्तीसगढ़ के उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में एक दुर्लभ 'उड़ने वाली गिलहरी' (Flying Squirrel) देखी गई है। सोशल मीडिया पर इस अनोखे जीव का वीडियो और तस्वीरें जमकर वायरल हो रही हैं। वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह एक बड़ी खुशखबरी है।

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Wildlife Update: मुख्य समाचार

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व से एक बेहद रोमांचक और दुर्लभ खबर सामने आई है। यहाँ वन विभाग की टीम और पर्यटकों ने एक 'उड़ने वाली गिलहरी' (Flying Squirrel) को देखा है। इस दुर्लभ जीव के एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर हवा में छलांग लगाते हुए अद्भुत दृश्य अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसे देखकर वन्यजीव प्रेमी और स्थानीय लोग हैरान हैं।

वैज्ञानिक रूप से 'उड़ने वाली गिलहरी' असल में पक्षियों की तरह उड़ती नहीं है, बल्कि इनके अगले और पिछले पैरों के बीच एक विशेष त्वचा (पैटाजियम) होती है, जो पैराशूट की तरह काम करती है। इसकी मदद से यह गिलहरी ऊंचे पेड़ों से लंबी छलांग लगाकर हवा में तैरते हुए (ग्लाइडिंग) काफी दूर तक जा सकती है। यह जीव आमतौर पर निशाचर (रात में सक्रिय रहने वाला) होता है, इसलिए इसे दिन के उजाले में देख पाना या कैमरे में कैद करना बहुत मुश्किल माना जाता है।

टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के अनुसार, उड़ने वाली गिलहरी का दिखना इस बात का प्रमाण है कि उदंती सीतानदी का इकोसिस्टम बेहद स्वस्थ और सुरक्षित है। इन जीवों के लिए घने और पुराने ऊंचे पेड़ों का होना अनिवार्य है। पिछले कुछ वर्षों में वन विभाग द्वारा किए गए संरक्षण प्रयासों और वनों की कटाई पर रोक लगाने के कारण यहाँ जैव विविधता (Biodiversity) में बढ़ोतरी देखी जा रही है। दुर्लभ जीवों की मौजूदगी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन रही है।


सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे यह नन्हा जीव बड़ी ही फुर्ती से हवा में कलाबाजियां खा रहा है। वन विभाग ने इस क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है ताकि इन दुर्लभ प्रजातियों को किसी भी प्रकार के मानवीय हस्तक्षेप या शिकार से बचाया जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि छत्तीसगढ़ के जंगलों में ऐसी कई विलुप्तप्राय प्रजातियां मौजूद हैं, जिनका दस्तावेजीकरण और संरक्षण किया जाना पर्यटन और पर्यावरण दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

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