गढ़चिरौली: महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित नक्सल प्रभावित जिले गढ़चिरौली में सुरक्षा बलों ने लाल आतंक के खिलाफ एक बड़ी "प्रतीकात्मक" जीत हासिल की है। गढ़चिरौली पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने नक्सलियों द्वारा गांव-गांव में स्थापित किए गए 44 नक्सली स्मारकों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। ये स्मारक नक्सलियों द्वारा मारे गए अपने साथियों की याद में बनाए गए थे, जिनका उपयोग वे ग्रामीणों में अपनी विचारधारा का प्रचार करने और युवाओं को गुमराह करने के लिए करते थे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ये स्मारक उन जगहों पर बनाए गए थे जहाँ सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में नक्सली मारे गए थे। नक्सली इन स्मारकों के जरिए ग्रामीणों के बीच अपनी पैठ बनाए रखने और सुरक्षा बलों के खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिश करते थे। पुलिस ने 'जनसंपर्क अभियान' और 'आतंक विरोधी अभियान' के तहत इन अवैध निर्माणों को ढहाने का फैसला लिया। इस कार्रवाई से नक्सलियों के उस मनोवैज्ञानिक प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी जो वे इन प्रतीकों के माध्यम से पैदा करते थे।
गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक (SP) ने बताया कि यह कार्रवाई पिछले कुछ दिनों में जिले के विभिन्न संवेदनशील इलाकों में की गई है। ध्वस्त किए गए स्मारक कसनसुर, एटापल्ली और भामरागढ़ जैसे अति-संवेदनशील क्षेत्रों में स्थित थे। सुरक्षा बलों का मानना है कि नक्सलियों के स्मारकों को नष्ट करना उनके मनोबल को तोड़ने की दिशा में एक प्रभावी कदम है। अब इन खाली जगहों पर सरकार विकास कार्यों और सामुदायिक भवनों के निर्माण की योजना बना रही है।
नक्सली इन स्मारकों को अक्सर 'अमर जवान ज्योति' की तर्ज पर पेश करते थे, ताकि वे अपनी हिंसक गतिविधियों को शहीद का दर्जा दे सकें। सुरक्षा बलों की इस सख्त कार्रवाई ने नक्सलियों के उस प्रचार तंत्र को ध्वस्त कर दिया है जो सालों से ग्रामीणों को भयभीत करने का काम करता था। इस बड़ी सफलता के बाद अब पूरे क्षेत्र में तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है। ग्रामीणों ने भी इस कदम की सराहना की है, क्योंकि वे इन प्रतीकों की आड़ में होने वाली नक्सली बैठकों से त्रस्त थे।








