बढ़ते मोटापे और टाइप-2 डायबिटीज के दौर में अब आपकी खाद्य सामग्री के पैकेट पर छपी जानकारी आपको बीमार होने से बचाएगी। फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग (FOPL) एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें पैकेट के सामने वाले हिस्से पर साफ और बड़े अक्षरों में नमक, चीनी और सैचुरेटेड फैट की मात्रा दर्शाई जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक उपभोक्ताओं को जागरूक बनाने में एक 'हथियार' की तरह काम करेगी, जिससे लोग अनजाने में अत्यधिक कैलोरी और हानिकारक तत्वों के सेवन से बच सकेंगे।
अक्सर लोग विज्ञापनों के बहकावे में आकर 'हेल्दी' लिखे उत्पादों को चुन लेते हैं, लेकिन उनके पीछे छिपी शुगर और सोडियम की भारी मात्रा शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करती है। FOPL के आने से उपभोक्ताओं को पैकेट को पलटने या बारीक अक्षरों को डिकोड करने की जरूरत नहीं होगी। पैकेट के सामने ही मौजूद रेड मार्किंग या स्टार रेटिंग यह तुरंत बता देगी कि वह उत्पाद आपकी सेहत के लिए कितना जोखिम भरा है।
फूड लेबल पढ़ने का सही तरीका केवल कैलोरी देखना नहीं है, बल्कि उसके 'इंग्रीडिएंट लिस्ट' पर गौर करना भी है। हमेशा ध्यान दें कि सामग्री की सूची में जो नाम सबसे पहले लिखा होता है, उस उत्पाद में उसकी मात्रा सबसे ज्यादा होती है। यदि किसी उत्पाद के पहले तीन नामों में शुगर, मैदा या पाम ऑयल शामिल है, तो वह मोटापे और डायबिटीज को सीधा निमंत्रण दे रहा है। इसके अलावा, 'हिडन शुगर' को पहचानने के लिए कॉर्न सिरप, माल्टोडेक्सट्रिन और फ्रुक्टोज जैसे नामों पर पैनी नजर रखना जरूरी है।
भारत में बढ़ते गैर-संचारी रोगों (NCDs) को रोकने के लिए सही खान-पान की दिशा में यह एक बड़ा क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है। जब हम 'सर्विंग साइज' और 'न्यूट्रिशनल वैल्यू' को समझकर खरीदारी करेंगे, तो हम न केवल अपना वजन नियंत्रित रख पाएंगे बल्कि भविष्य में होने वाली मेटाबॉलिक बीमारियों के जोखिम को भी न्यूनतम कर सकेंगे। याद रखें, एक जागरूक उपभोक्ता ही एक स्वस्थ शरीर का मालिक होता है।







