खैरागढ़। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के वनांचल क्षेत्र से वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद विचलित और हैरान करने वाली खबर सामने आई है। जिले के ग्राम दल्लीखोली और लछना के घने जंगल के भीतर एक प्राकृतिक जलस्रोत (पानी के गड्ढे) के पास बड़ी संख्या में राष्ट्रीय पक्षी मोर, दुर्लभ वन्यजीव सिवेट (कस्तूरी बिल्ली) और दर्जनों अन्य प्रजातियों के पक्षियों के शव संदिग्ध अवस्था में पड़े मिले हैं। इस दर्दनाक मंजर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने न सिर्फ पर्यावरण प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि वन विभाग के महकमे में भी हड़कंप मचा दिया है।
वीडियो वायरल होने और ग्रामीणों द्वारा सूचना दिए जाने के बाद वन विभाग की टीम तुरंत अलर्ट मोड पर आ गई है और आला अधिकारी मौके के लिए रवाना हो गए हैं। घटनास्थल की स्थिति को देखकर आशंका जताई जा रही है कि भीषण गर्मी के इस दौर में बेजुबान जानवरों और पक्षियों को निशाना बनाने के लिए शिकारियों या शरारती तत्वों द्वारा जंगल के इस इकलौते जलस्रोत के पानी में कोई घातक जहर मिलाया गया था। पानी पीते ही इन बेजुबान जीवों की तड़प-तड़प कर मौके पर ही मौत हो गई।
बड़ी लापरवाही या साज़िश?: वन विभाग अब इस बात की जांच कर रहा है कि यह शिकारियों की कोई बड़ी साज़िश है या फिर फसल की सुरक्षा के लिए किसानों द्वारा डाले गए किसी कीटनाशक का असर। जलस्रोत के पानी के सैंपल को जांच के लिए लैब भेजा जा रहा है।
मामला सामने आने के बाद वन्यजीव प्रेमियों ने दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग उठाई है। वन विभाग की टीम ने सभी मृत पक्षियों और जानवरों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है ताकि मौत के असली कारणों (विषाक्तता या बीमारी) का सटीक पता लगाया जा सके। इसके साथ ही आसपास के जंगलों में सर्चिंग बढ़ा दी गई है। खैरागढ़ के इस बड़े वन्यजीव हादसे की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वन विभाग की कार्रवाई की लाइव अपडेट जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर विजिट करें।







