अंबिकापुर। जिले में सरकारी वन भूमि को निजी जमीन बताकर बेचने का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने वन विभाग की जमीन को अपनी निजी संपत्ति बताकर 41 लोगों को प्लॉट बेच दिए और उनसे लाखों रुपये वसूल लिए। मामले के खुलासे के बाद पुलिस ने इस पूरे फर्जीवाड़े के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने जमीन से जुड़े नकली दस्तावेज और अनुबंध पत्र तैयार कर लोगों को भरोसे में लिया। उसने लंबे समय तक जमीन पर अपना कब्जा बताकर उसे निजी संपत्ति के रूप में प्रचारित किया और जरूरतमंद लोगों को सस्ते दामों पर प्लॉट देने का झांसा दिया। कई लोगों ने जीवन भर की जमा पूंजी लगाकर जमीन खरीदी, लेकिन बाद में पता चला कि वह जमीन सरकारी वन क्षेत्र में दर्ज है।
मामला तब उजागर हुआ जब कुछ खरीदारों ने जमीन पर निर्माण कराने की कोशिश की और वन विभाग की ओर से आपत्ति दर्ज की गई। रिकॉर्ड खंगालने पर स्पष्ट हुआ कि जिस जमीन की खरीद-फरोख्त की गई, वह कभी भी निजी स्वामित्व में रही ही नहीं। इसके बाद शिकायत के आधार पर पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त जांच शुरू की।
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने जमीन बिक्री से जुड़े कई अहम राज उगले हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ दस्तावेज जानबूझकर नष्ट किए गए, ताकि सच्चाई सामने न आ सके। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी संपत्ति से जुड़े गंभीर अपराधों के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं, प्रशासन ने पीड़ित लोगों को आश्वासन दिया है कि उनके साथ हुए अन्याय की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के बाद इलाके में जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर लोगों में डर और नाराजगी है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि भविष्य में भूमि रिकॉर्ड की सख्त जांच के बाद ही रजिस्ट्री और सौदे किए जाएं, ताकि इस तरह की धोखाधड़ी दोबारा न हो।








