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History Update: एर्राबोर कांड की खौफनाक सच्चाई, 2 घंटे तक चला हमला, 35 ग्रामीणों की हत्या

History Update के तहत एर्राबोर में हुआ माओवादी हमला आज भी देश के सबसे खौफनाक नक्सली हमलों में गिना जाता है। यह हमला साल 2006 में उस समय हुआ जब क्षेत्र में तनाव चरम पर था और हजारों ग्रामीण राहत शिविरों में रह रहे थे।

जानकारी के मुताबिक, माओवादियों ने राहत शिविर पर करीब 2 घंटे तक हमला किया। इस दौरान उन्होंने अंधाधुंध हिंसा करते हुए करीब 30 से अधिक ग्रामीणों (लगभग 35) की हत्या कर दी, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।
हमले के दौरान माओवादियों ने शिविर और आसपास के गांवों में जमकर आगजनी की। रिपोर्ट्स के अनुसार 200 से अधिक (करीब 220) घरों को जला दिया गया, जिससे सैकड़ों लोग बेघर हो गए और पूरे इलाके में दहशत फैल गई।
यह घटना उस दौर में हुई जब सलवा जुडूम आंदोलन के चलते ग्रामीणों को अपने गांव छोड़कर कैंपों में रहना पड़ रहा था। माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष का सबसे बड़ा खामियाजा आम ग्रामीणों को उठाना पड़ा।
एर्राबोर कांड आज भी नक्सल हिंसा के इतिहास का एक काला अध्याय माना जाता है, जिसने सुरक्षा, विस्थापन और आदिवासी इलाकों में शांति बहाली को लेकर कई बड़े सवाल खड़े किए।







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