रायगढ़, 4 अगस्त। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले अंतर्गत आने वाले लैलूंगा विधानसभा क्षेत्र के तमनार ब्लॉक से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने वाली एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। तमनार क्षेत्र के नागरमुड़ा में कोयला खदान आवंटन के बाद जिन्दल प्रबंधन द्वारा बीते महज एक महीने के भीतर 40 हजार से भी अधिक हरे-भरे पेड़ों को काट गिराया गया है। इस अंधाधुंध कटाई के कारण कभी घना और समृद्ध रहने वाला नागरमुड़ा का जंगल अब पूरी तरह ठूंठ और बंजर में तब्दील हो चुका है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वन विभाग द्वारा प्रबंधन को लगभग 16 हजार पेड़ों की कटाई की ही आधिकारिक अनुमति दी गई थी। हालांकि, आरोप है कि स्वीकृत सीमा को दरकिनार करते हुए अनुमति की आड़ में 40 हजार से ज्यादा छोटे-बड़े पेड़ धराशायी कर दिए गए। इतना ही नहीं, कटाई के दौरान कानून और पर्यावरण नियमों को ताक पर रखते हुए बेशकीमती सागौन के साथ-साथ राज्य में प्रतिबंधित श्रेणी में आने वाले सराई (साल) के पेड़ों को भी बड़ी संख्या में काट दिया गया, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों में भारी आक्रोश है।
मामले को लेकर जन चेतना मंच के संयोजक और पर्यावरण प्रेमी राजेश त्रिपाठी का कहना है कि जिंदल प्रबंधन ने वन विभाग से मिली अनुमति का सरासर दुरुपयोग किया है और नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया गया है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों ने इस अवैध व बेतहाशा वृक्ष कटाई पर तुरंत रोक लगाने, पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों व प्रबंधन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।







