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दुर्ग: नेशनल कबड्डी प्रतियोगिता में हंगामा, छत्तीसगढ़ पर 'ओवरएज' खिलाड़ी खिलाने का आरोप; राजस्थान टीम का वॉकआउट...

Chhattisgarh RRT News Desk 10 January 2026

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छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में आयोजित 68वीं नेशनल स्कूल गेम्स कबड्डी प्रतियोगिता में उस समय भारी हंगामा हो गया, जब राजस्थान की टीम ने मेजबान छत्तीसगढ़ पर गंभीर आरोप लगाए। राजस्थान टीम का दावा है कि छत्तीसगढ़ ने नियमों को ताक पर रखकर अपनी टीम में 'ओवरएज' (निर्धारित आयु से अधिक) खिलाड़ियों को शामिल किया है। इस मुद्दे को लेकर मैदान पर काफी देर तक गरमागरम बहस हुई, जिसके बाद विवाद इतना बढ़ा कि राजस्थान की टीम ने प्रतियोगिता का बहिष्कार करने का फैसला कर लिया।

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विवाद की शुरुआत छत्तीसगढ़ और राजस्थान के बीच मैच के दौरान हुई। राजस्थान के कोच और खिलाड़ियों ने विपक्षी टीम के कुछ खिलाड़ियों की शारीरिक बनावट और दाढ़ी-मूंछों को लेकर आपत्ति जताई। उनका आरोप था कि ये खिलाड़ी स्कूल स्तर की प्रतियोगिता के मानक से कहीं ज्यादा उम्र के हैं। जब राजस्थान की टीम ने इस पर लिखित विरोध दर्ज कराना चाहा, तो उनका आरोप है कि वहां मौजूद अधिकारियों और स्थानीय स्टाफ ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया, जिससे नाराज होकर टीम ने खेल बीच में ही छोड़ दिया।

राजस्थान टीम के प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने निष्पक्ष जांच और खिलाड़ियों के दस्तावेजों (Eligibility Documents) के पुन: सत्यापन की मांग की थी, जिसे अनसुना कर दिया गया। टीम का आरोप है कि उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की गई, जिसके कारण खिलाड़ी मानसिक रूप से आहत हुए और उन्होंने वापस लौटने का निर्णय लिया। राजस्थान टीम के अचानक लौट जाने से प्रतियोगिता के शेड्यूल पर बुरा असर पड़ा है और खेल भावना को भी ठेस पहुँची है।

दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ खेल विभाग और आयोजन समिति ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी खिलाड़ियों के दस्तावेजों की जांच स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) के नियमों के अनुसार पहले ही की जा चुकी है। उनका तर्क है कि अगर किसी खिलाड़ी को लेकर संदेह था, तो उसे नियमों के तहत चैलेंज किया जाना चाहिए था, न कि मैदान छोड़कर भागना चाहिए था। समिति ने दुर्व्यवहार के आरोपों को भी निराधार बताया है।

इस विवाद के बाद अब नेशनल स्कूल गेम्स की साख पर सवाल उठने लगे हैं। खेल प्रेमी और विशेषज्ञ मांग कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए खिलाड़ियों का बोन मैरो टेस्ट या कड़े मेडिकल टेस्ट अनिवार्य होने चाहिए। फिलहाल, राजस्थान टीम वापस लौट चुकी है और अब गेंद SGFI के पाले में है कि वह इस मामले में छत्तीसगढ़ के खिलाफ जांच बैठाती है या राजस्थान टीम पर अनुशासनहीनता की कार्रवाई करती है।

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