भिलाई: शहर में चल रही मकानों की गणना और नंबरिंग प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही सामने आई है। मॉनिटरिंग के अभाव में गणना करने वाली टीम ने एक ही मकान के अलग-अलग दरवाजों पर अलग-अलग नंबर अंकित कर दिए हैं। इस अजीबो-गरीब सर्वे ने न केवल प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है, बल्कि भविष्य में सरकारी योजनाओं के डेटा और पते (Address) को लेकर भी बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। स्थानीय निवासियों ने इस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे सरकारी धन और समय की बर्बादी बताया है।
जानकारी के अनुसार, भिलाई नगर निगम के कई वार्डों में इन दिनों डिजिटल डोर नंबरिंग का काम चल रहा है। नियमतः एक होल्डिंग या एक मकान के लिए एक विशिष्ट यूनिक नंबर दिया जाना चाहिए, लेकिन सर्वे टीम ने बिना जांच-पड़ताल किए घर के मुख्य द्वार से लेकर पीछे के दरवाजे और किराएदारों के अलग प्रवेश द्वारों पर भी अलग-अलग नंबर डाल दिए हैं। इससे अब एक ही परिवार के पास दो से तीन अलग-अलग डोर नंबर हो गए हैं, जो कागजों पर एक घर को तीन अलग-अलग संपत्तियों के रूप में दिखाएंगे।
इस लापरवाही के पीछे अधिकारियों की निगरानी की कमी को मुख्य कारण माना जा रहा है। लोगों का कहना है कि गणना करने वाले कर्मचारी बिना किसी वरिष्ठ अधिकारी के मार्गदर्शन के जल्दबाजी में काम निपटा रहे हैं। यदि इस गलती को समय रहते नहीं सुधारा गया, तो आने वाले समय में संपत्ति कर (Property Tax), कचरा संग्रहण शुल्क और डाक सेवाओं में भारी विसंगतियां पैदा होंगी। फिलहाल, निगम प्रशासन ने मामले की जांच करने और त्रुटियों को ठीक करने का आश्वासन दिया है।








