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'किसी को नहीं छोड़ेंगे': डोनाल्ड ट्रंप की दुनिया को चेतावनी—ग्रीनलैंड डील पर साथ न देने वाले देशों पर लगेगा भारी 'टैरिफ'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे के तहत अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि जो भी देश ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की योजना का समर्थन नहीं करेंगे, उन्हें आर्थिक परिणामों का सामना करना होगा। व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा, "अगर कोई देश ग्रीनलैंड के मुद्दे पर हमारा साथ नहीं देता है, तो मैं उन पर भारी टैरिफ (आयात शुल्क) लगा सकता हूँ।" यह पहली बार है जब ट्रंप ने ग्रीनलैंड के मुद्दे को सीधे व्यापारिक शुल्कों से जोड़ा है।

ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका के लिए एक 'राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता' बताया है। उनका तर्क है कि यदि अमेरिका इस रणनीतिक द्वीप पर कब्जा नहीं करता है, तो चीन और रूस वहां अपना प्रभाव बढ़ा सकते हैं, जो भविष्य में अमेरिका के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड केवल एक जमीन का टुकड़ा नहीं बल्कि संसाधनों से भरपूर एक रणनीतिक संपत्ति है जिसे अमेरिका किसी भी कीमत पर हासिल करना चाहता है।
इस विवाद के केंद्र में डेनमार्क है, जिसका ग्रीनलैंड एक स्वायत्त हिस्सा है। डेनमार्क ने बार-बार कहा है कि "ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है।" इस सप्ताह वाशिंगटन में हुई उच्च स्तरीय बातचीत भी बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई, जिसे डेनमार्क के विदेश मंत्री ने 'मौलिक असहमति' करार दिया। ट्रंप की टैरिफ वाली धमकी को यूरोपीय सहयोगियों पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, ताकि वे डेनमार्क पर समझौते के लिए दबाव डालें।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम वैश्विक व्यापारिक संबंधों में तनाव पैदा कर सकता है। इससे पहले ट्रंप ने दवाओं के आयात पर यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, और अब ग्रीनलैंड को भी उसी श्रेणी में खड़ा कर दिया है। जहाँ एक ओर ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने के लिए 'सैन्य बल' के इस्तेमाल तक के संकेत दे चुका है, वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस कूटनीतिक दबाव को लेकर गहरी चिंता व्यक्त कर रहा है।







