RRT News रायपुर: छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित इलाकों में अब विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। जिन दुर्गम जंगलों में कभी गोलियों की तड़तड़ाहट से दहशत फैलती थी, अब वहां मोबाइल फोन की घंटी सुनाई देगी। केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयास से प्रदेश के नक्सल मुक्त हो रहे क्षेत्रों में 5,000 नए मोबाइल टावर लगाने की मेगा योजना को मंजूरी मिल गई है। यह कदम बस्तर जैसे अंचलों को सीधे डिजिटल दुनिया से जोड़ने की दिशा में सबसे बड़ा प्रहार माना जा रहा है।
सड़क और सुरक्षा कैंपों के विस्तार के बाद अब सरकार का पूरा फोकस 'डिजिटल कनेक्टिविटी' पर है। इन टावरों के लगने से न केवल सुरक्षा बलों को ऑपरेशंस के दौरान सटीक सूचनाएं मिलेंगी, बल्कि अंदरूनी गांवों में रहने वाले आदिवासियों को भी पहली बार हाई-स्पीड इंटरनेट का अनुभव मिलेगा। इससे माओवादियों का सूचना तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा और विकास की मुख्यधारा अंतिम व्यक्ति तक पहुँचेगी।
योजना के मुताबिक, इन टावरों को उन इलाकों में प्राथमिकता के आधार पर लगाया जा रहा है, जिन्हें हाल ही में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के कब्जे से मुक्त कराया है। अब यहां के युवा ऑनलाइन पढ़ाई कर सकेंगे, ग्रामीण बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठा पाएंगे और सरकार की योजनाओं का पैसा सीधे उनके खातों में डिजिटल रूप से पहुँच सकेगा। यह डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बस्तर के युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खोलेगा।
कभी 'नो सिग्नल जोन' माने जाने वाले इन इलाकों में अब 4G और 5G की लहर दौड़ेगी। स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर जबरदस्त खुशी है कि अब उन्हें अपनों से बात करने के लिए पहाड़ों पर नहीं चढ़ना पड़ेगा। बस्तर के इस बदलाव को 'बुलेट से डिजिटल' की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़ कहा जा रहा है, जो आने वाले समय में नक्सलवाद के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा।








