RRT News धमतरी: 24 साल का सूखा खत्म, घर आई 'राजकुमारी' कहते हैं बेटियां भाग्य से आती हैं, और जब पूरे 24 साल के लंबे इंतजार के बाद घर में नन्ही परी के कदम पड़ें, तो जश्न तो बनता ही है। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कोसरिया परिवार ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। परिवार में दो दशकों से ज्यादा समय से किसी बेटी का जन्म नहीं हुआ था, इसलिए जैसे ही इस नन्ही जान ने दुनिया में कदम रखा, परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस पल को यादगार बनाने के लिए परिवार ने इसे किसी बड़े उत्सव की तरह मनाया।
अस्पताल से घर तक 'शाही' सफर
इस जश्न की सबसे खास बात बेटी का अस्पताल से घर तक का सफर रहा। आमतौर पर लोग सादगी से घर लौटते हैं, लेकिन कोसरिया परिवार ने अपनी लाडली के लिए कार को फूलों और विशेष बैनरों से सजाया। कार पर बड़े-बड़े अक्षरों में बेटी के आगमन की खुशी जाहिर की गई थी। सड़क पर जिसने भी यह नजारा देखा, वह देखता ही रह गया। ढोल-नगाड़ों की थाप और अपनों के प्यार के बीच बेटी को 'राजकुमारी' की तरह घर लाया गया।
बदलती सोच की खूबसूरत तस्वीर
धमतरी की सड़कों पर निकला यह कारवां केवल एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि समाज की बदलती सोच का प्रतीक है। कोसरिया परिवार ने यह साबित कर दिया कि बेटियां वंश का गौरव होती हैं। घर पहुंचने पर नन्ही परी का स्वागत आरती उतारकर और फूलों की वर्षा के साथ किया गया। परिवार के बुजुर्गों की आंखों में खुशी के आंसू थे, तो युवाओं में अपनी छोटी बहन के आने का जबरदस्त उत्साह। यह जश्न उन लोगों के लिए एक बड़ी सीख है जो आज भी बेटे-बेटी में फर्क करते हैं।
सोशल मीडिया पर मिल रही हैं बधाइयां
इस अनूठे स्वागत की तस्वीरें अब इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोर रही हैं। लोग कोसरिया परिवार की इस पहल को 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान की सबसे सच्ची और प्रेरणादायक तस्वीर बता रहे हैं। धमतरी का यह परिवार अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग न केवल बिटिया को आशीर्वाद दे रहे हैं, बल्कि इस परिवार की प्रगतिशील सोच की भी जमकर सराहना कर रहे हैं। वाकई, बेटियों का सम्मान ही समाज का असली सम्मान है।

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