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धान से आगे बढ़ा धमतरी: फसलचक्र परिवर्तन ने बदली किसानों की तकदीर; जल संरक्षण के साथ खेती बनी अब 'लाभ का धंधा'...

Chhattisgarh RRT News Desk 22 January 2026

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धमतरी/रायपुर: छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला कृषि के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव का गवाह बन रहा है। राज्य सरकार की 'फसलचक्र परिवर्तन' की अपील और प्रोत्साहन का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। यहाँ के किसान अब धान की खेती के मोह को छोड़कर मक्का, दलहन, तिलहन और रागी जैसी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। इस बदलाव ने न केवल जिले में जल संरक्षण की नई कहानी लिखी है, बल्कि किसानों की कृषि समृद्धि के द्वार भी खोल दिए हैं।

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क्यों जरूरी हुआ फसलचक्र परिवर्तन?

धमतरी जिला प्रचुर जल संसाधनों के लिए जाना जाता है, लेकिन रबी सीजन में धान की खेती के कारण भू-जल का अत्यधिक दोहन चिंता का विषय बन गया था। धान की फसल में पानी की खपत सबसे ज्यादा होती है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने किसानों को कम पानी वाली फसलों के लिए जागरूक किया।

फायदा: मक्का और दलहन जैसी फसलों में धान की तुलना में 60-70% कम पानी की आवश्यकता होती है।

मिट्टी की सेहत: एक ही फसल बार-बार उगाने से मिट्टी की उर्वरता कम होती है, जबकि फसल बदलकर लगाने से नाइट्रोजन फिक्सेशन होता है और मिट्टी उपजाऊ बनी रहती है।

कृषि समृद्धि की नई कहानी: बढ़ रही आमदनी

किसानों का अनुभव बताता है कि धान के मुकाबले अन्य फसलों में लागत कम और मुनाफा अधिक है।

मक्का और रागी की मांग: वर्तमान में मिलेट्स (Millets) और मक्का की बाजार में अच्छी मांग है। सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी की गारंटी ने किसानों का उत्साह बढ़ाया है।

इनपुट सब्सिडी: राज्य सरकार फसलचक्र अपनाने वाले किसानों को विशेष प्रोत्साहन राशि और इनपुट सब्सिडी प्रदान कर रही है, जिससे आर्थिक बोझ कम हुआ है।

जल संरक्षण: भविष्य की तैयारी

धमतरी के इस मॉडल की सराहना प्रदेश स्तर पर हो रही है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि इसी तरह किसान दलहन-तिलहन को अपनाते रहे, तो आने वाले कुछ वर्षों में जिले का Ground Water Level काफी ऊपर आ जाएगा। यह न केवल वर्तमान खेती के लिए, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी जल सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

सफलता की मिसाल बनते प्रगतिशील किसान

जिले के कई प्रगतिशील किसानों ने उदाहरण पेश किया है। जो किसान पहले केवल धान पर निर्भर थे, वे अब फल और सब्जियों की खेती से लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा आयोजित कार्यशालाओं और 'खेत पाठशालाओं' ने तकनीक और बाजार की समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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