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झीरम कांड पर सियासत तेज: दीपक बैज ने की डॉ. रमन सिंह और जेपी नड्डा के नार्को टेस्ट की मांग....

Political RRT News Desk 23 December 2025

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जगदलपुर: झीरम घाटी नक्सली हमले को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। जांजगीर-चांपा में भाजपा के 'जनादेश परब' के दौरान जेपी नड्डा द्वारा लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC Chief) दीपक बैज ने कड़ा रुख अपनाया है। बैज ने मंगलवार को जगदलपुर के राजीव भवन में प्रेस वार्ता कर जेपी नड्डा के बयान को "स्तरहीन और शहीद परिवारों का अपमान" करार दिया है।

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दीपक बैज ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से माफी की मांग करते हुए कई गंभीर सवाल दागे। उन्होंने कहा कि जब झीरम की भीषण घटना हुई, तब राज्य में भाजपा की सरकार थी और डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री थे। बैज ने पूछा कि जब नक्सलियों ने कांग्रेस की 'परिवर्तन यात्रा' के विरोध में पहले ही प्रेस नोट जारी कर दिया था, तो तत्कालीन सरकार ने सुरक्षा मुहैया क्यों नहीं कराई? उन्होंने आरोप लगाया कि सुकमा से गुजरते समय सुरक्षा हटाना एक बड़ी साजिश का हिस्सा था।

पीसीसी चीफ ने इंटेलिजेंस की विफलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि झीरम में घटना से 15 दिन पहले ही नक्सलियों का जमावड़ा शुरू हो गया था, फिर भी IB और LIB जैसी एजेंसियां क्या कर रही थीं? उन्होंने इस पूरी घटना को 'टार्गेट किलिंग' और 'सुपारी किलिंग' बताते हुए कहा कि भाजपा ने सत्ता पाने के लिए इस नरसंहार को होने दिया। बैज के अनुसार, उस समय जेपी नड्डा छत्तीसगढ़ के प्रभारी थे, इसलिए उन्हें सच पता है और उन्हें इसे सार्वजनिक करना चाहिए।

मामले में सबसे बड़ा हमला करते हुए दीपक बैज ने मांग की है कि दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और जेपी नड्डा का नार्को टेस्ट कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नड्डा का यह कहना कि इसमें कांग्रेस नेताओं का हाथ है, पूरी तरह से मनगढ़ंत है और वे अपनी जिम्मेदारी से भागने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं।

झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक हत्याकांड है, जिसमें कांग्रेस की तत्कालीन शीर्ष लीडरशिप खत्म हो गई थी। अब 12 साल बाद भी इस पर जारी आरोप-प्रत्यारोप ने यह साफ कर दिया है कि यह मुद्दा आगामी चुनावों में भी गर्म रहने वाला है। कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वे शहीदों के अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे और इस लड़ाई को सड़क से लेकर सदन तक लड़ेंगे।

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