दंतेवाड़ा जिले को जैविक कृषि का मॉडल जिला बनाने और किसानों को रासायनिक खादों व कीटनाशकों से मुक्त कर प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए एक दिवसीय विशेष कृषि कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में बड़ी संख्या में स्थानीय किसानों, ग्रामीण युवाओं और महिला स्व-सहायता समूहों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन, परिवहन, सहकारिता एवं जिला प्रभारी मंत्री केदार कश्यप रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जैविक खेती केवल उत्पादन बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का मजबूत आधार है।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है। उन्होंने किसानों से खेतों की मेड़ों पर अधिक से अधिक पौधारोपण करने की अपील की ताकि भूमि संरक्षण और जल संवर्धन को बढ़ावा मिल सके। वहीं क्षेत्रीय विधायक चौतराम अटामी ने कहा कि वैज्ञानिक जानकारी और आधुनिक तकनीक को अपनाकर जिले के किसान पहले से बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ कमा रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इस कृषि महोत्सव के दौरान कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य विभाग और भूमगादी संस्था द्वारा आकर्षक विकास प्रदर्शनी स्टॉल लगाए गए, जहां किसानों को नए नवाचारों की जानकारी दी गई। कार्यशाला में कृषि वैज्ञानिकों ने हरी खाद, वर्मी कम्पोस्ट और प्राकृतिक कीट प्रबंधन पर महत्वपूर्ण टिप्स दिए। कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा रागी (मड़ुआ) से तैयार किया गया केक रहा, जिसे मुख्य अतिथि ने काटकर महिलाओं के इस हुनर की जमकर सराहना की। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी, उपाध्यक्ष अरविंद कुंजाम, जनपद पंचायत अध्यक्ष सुनीता भास्कर सहित भारी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित थे।






_m.webp)
