रायपुर। डानकुनी-सूरत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के बीच जमीन के उपयोग में बदलाव और संभावित रूप से बढ़े हुए मुआवजे को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, रायपुर में कुछ कृषि भूमि को औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोग में परिवर्तित किए जाने के मामलों की पड़ताल की जा रही है।

प्रतिबंध के बावजूद जमीनों के डायवर्जन का दावा
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कलेक्टर स्तर से प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद करीब 25 प्रकरणों में लगभग 35 एकड़ कृषि भूमि के औद्योगिक एवं व्यावसायिक उपयोग के लिए डायवर्जन किए जाने की बात सामने आई है। आरोप यह है कि भूमि के उपयोग में बदलाव से अधिग्रहण के समय मिलने वाले मुआवजे की राशि बढ़ सकती है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित प्रशासनिक जांच और दस्तावेजों के आधार पर ही होगी।
भूमि अधिग्रहण में गड़बड़ियों पर पहले भी उठे सवाल
रायपुर जिला प्रशासन की वेबसाइट पर प्रकाशित पूर्व अधिसूचनाओं में भी भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में अधिक मुआवजा प्राप्त करने के उद्देश्य से मूल खसरे को छोटे भूखंडों में विभाजित करने, अधिसूचना के बाद भूमि के हस्तांतरण या डायवर्जन तथा गलत तरीके से नामांतरण जैसे मामलों की जांच का उल्लेख किया गया है।
25 गांवों की जमीन होगी प्रभावित
डानकुनी-सूरत मालवाहक रेल कॉरिडोर के लिए दुर्ग जिले के 25 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया से संबंधित जमीन की खरीद-बिक्री, खाता विभाजन और अंतरण पर रोक की जानकारी भी सामने आई है। प्रस्तावित कॉरिडोर छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों से होकर गुजरने वाला महत्वपूर्ण मालवाहक रेल मार्ग है।
जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
भूमि अधिग्रहण के मामलों में जमीन की वास्तविक स्थिति, उपयोग, स्वामित्व और उस पर मौजूद परिसंपत्तियों का सही मूल्यांकन मुआवजा तय करने में महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि प्रतिबंध के बावजूद जमीनों के डायवर्जन के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह प्रशासनिक जांच का गंभीर विषय बन सकता है। फिलहाल पूरे मामले में संबंधित दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मुआवजा बढ़ाने के लिए नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं।






