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नाबालिग से दरिंदगी करने वाले को 20 साल का कठोर कारावास, कोर्ट ने पीड़िता के लिए 5 लाख के मुआवजे का सुनाया

RRT News- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की एक विशेष अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत त्वरित सुनवाई के बाद लिया गया है, जो समाज में महिलाओं और बच्चों के प्रति होने वाले अपराधों के खिलाफ एक सख्त संदेश देता है। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में इस कृत्य को बेहद गंभीर और निंदनीय बताया है।

पीड़िता को 5 लाख रुपये आर्थिक सहायता का आदेश
सजा के साथ-साथ, माननीय न्यायालय ने पीड़िता के भविष्य और उसके मानसिक व शारीरिक पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश जारी किया है। यह राशि शासन द्वारा पीड़िता को प्रदान की जाएगी, ताकि वह अपने जीवन को फिर से संवार सके। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसलों से न केवल अपराधियों में भय पैदा होता है, बल्कि पीड़ितों को न्याय मिलने के साथ-साथ आर्थिक संबल भी प्राप्त होता है।
मामले की पृष्ठभूमि और पुलिसिया कार्रवाई
यह मामला रायपुर जिले का है, जहाँ आरोपी ने एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था। घटना की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद, रायपुर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए और चालान पेश किया। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए गवाहों और ठोस सबूतों के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी पाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों के खिलाफ होने वाले ऐसे जघन्य अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती।
न्याय व्यवस्था पर बढ़ा जनता का भरोसा
इस फैसले के बाद कानूनी गलियारों और आम जनता के बीच चर्चा है कि त्वरित न्याय से न्यायपालिका पर लोगों का भरोसा और मजबूत हुआ है। रायपुर की अदालत ने केस की सुनवाई को बिना किसी अनावश्यक देरी के पूरा किया, जो प्रदेश में सुरक्षा और न्याय का एक सकारात्मक उदाहरण है। प्रशासन ने भी कहा है कि मुआवजे की राशि का भुगतान निर्धारित समय सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा ताकि पीड़िता को तत्काल मदद मिल सके।







