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कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 104 साल के बुजुर्ग की जमीन पर फर्जी लोन लेने वाले एक्सिस बैंक के पूर्व अधिकारी समेत 4 जालसाजों को 3-3 साल की कड़ी सजा

बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर की एक अदालत ने बुजुर्गों के साथ होने वाली धोखाधड़ी और बैंकिंग जालसाजी के मामले में एक बेहद नजीर पेश करने वाला ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) अनुप तिग्गा की अदालत ने एक 104 वर्षीय अति-बुजुर्ग व्यक्ति की 20 एकड़ बेशकीमती जमीन के फर्जी दस्तावेज (कूटरचित दस्तावेज) तैयार कर बैंक से लाखों रुपये का फर्जी लोन निकालने वाले एक शातिर गिरोह को कड़ा सबक सिखाया है। अदालत ने एक्सिस बैंक (Axis Bank) के तत्कालीन लोन अधिकारी सुमन कार्तिक रथ सहित कुल चार आरोपियों को धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने का दोषी पाते हुए 3-3 वर्ष के सश्रम कारावास (कठोर कारावास) और आर्थिक दंड (जुर्माने) की सजा सुनाई है।

अदालत में चले मामले के अनुसार, जालसाजों के इस गिरोह ने 104 साल के बुजुर्ग की लाचारी और उम्र का नाजायज फायदा उठाने की बड़ी साजिश रची थी। आरोपियों ने बुजुर्ग की 20 एकड़ जमीन के मालिकाना हक के फर्जी कागजात तैयार किए और एक्सिस बैंक के तत्कालीन लोन अधिकारी सुमन कार्तिक रथ के साथ मिलीभगत कर बैंक से लाखों रुपये का लोन पास करा लिया। इस फर्जी लोन की रकम को आरोपियों ने आपस में बांटकर बैंक और बुजुर्ग दोनों को ही भारी चपत लगाई थी। जब इस बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा हुआ, तब पुलिस ने मामले में गंभीरता से जांच करते हुए कोर्ट में पुख्ता चार्जशीट पेश की थी।
विचारण (Trial) के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट अनुप तिग्गा की अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए गवाहों, फोरेंसिक साक्ष्यों और बैंक के दस्तावेजों का गहन अध्ययन किया। कोर्ट ने माना कि आरोपियों ने न केवल एक अत्यंत बुजुर्ग व्यक्ति के अधिकारों का हनन किया, बल्कि बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा में सेंध लगाकर एक गंभीर आर्थिक अपराध को अंजाम दिया है। कोर्ट ने चारों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की सुसंगत धाराओं के तहत दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस फैसले से लोन धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों और भ्रष्ट बैंक अधिकारियों में डर पैदा होगा।







