जगदलपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में मतांतरण (धर्म परिवर्तन) का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। भानपुरी पंचायत के करंदोला गांव में एक ईसाई मत अपनाने वाली महिला के निधन के बाद शव को दफनाने को लेकर ग्रामीणों और परिजनों के बीच भारी विवाद उत्पन्न हो गया। ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामाजिक नियमों का हवाला देते हुए गांव की जमीन पर शव दफनाने का कड़ा विरोध किया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि प्रशासन और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिससे क्षेत्र में वैचारिक मतभेद और सामाजिक दूरी की गहरी खाई उजागर हुई है।
ग्रामीणों का तर्क है कि जो व्यक्ति अपनी मूल संस्कृति और पारंपरिक आस्था को छोड़ चुका है, उसे गांव की सामूहिक जमीन या पूर्वजों के स्थान पर दफनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। दूसरी ओर, मृतक के परिजनों का कहना है कि वे इसी गांव के निवासी हैं और उन्हें अपने धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार करने का संवैधानिक अधिकार है। यह विवाद केवल एक शव के अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने बस्तर के गांवों में सदियों से चली आ रही सामाजिक एकता और पारंपरिक रीतियों बनाम नए धार्मिक बदलावों के बीच एक बड़ी बहस छेड़ दी है।
बस्तर में पिछले कुछ वर्षों में इस तरह के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जहाँ अंतिम संस्कार और सामाजिक आयोजनों को लेकर मतांतरित और मूल निवासियों के बीच टकराव की स्थिति बनती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन विवादों का कोई सर्वमान्य सामाजिक समाधान नहीं निकाला गया, तो यह आदिवासी समाज की पारंपरिक संरचना के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। फिलहाल, पुलिस प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए गांव में निगरानी बढ़ा दी है, लेकिन वैचारिक स्तर पर सुलगी यह आग क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बनी हुई है।







