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Health News: थकान और चिड़चिड़ापन कम करने में मददगार हो सकती है कलर थेरेपी, जानें कैसे

HEALTH 27 August 2026

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रंगों का हमारे मूड और भावनाओं पर असर पड़ सकता है। इसी अवधारणा पर आधारित कलर थेरेपी यानी रंगों के माध्यम से मन को सुकून देने की प्रक्रिया का इस्तेमाल तनाव और भावनात्मक बेचैनी को कम करने के लिए किया जाता है। अलग-अलग रंगों को देखने और उनके वातावरण में रहने से व्यक्ति को मानसिक रूप से रिलैक्स महसूस हो सकता है।

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कुछ लोग नीले और हरे जैसे शांत रंगों को सुकून देने वाला मानते हैं, जबकि पीला और नारंगी जैसे रंग सकारात्मकता एवं ऊर्जा का अहसास करा सकते हैं। रंगों का चयन व्यक्ति की पसंद और अनुभव के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। घर या कार्यस्थल के वातावरण में पसंदीदा और शांत रंगों का इस्तेमाल मूड को बेहतर महसूस कराने में मदद कर सकता है।

हालांकि, कलर थेरेपी को किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या का पक्का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। लगातार थकान, अत्यधिक गुस्सा, चिड़चिड़ापन, तनाव या अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बनी रहें तो योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। कलर थेरेपी को जरूरत के अनुसार अन्य प्रमाणित उपचारों के साथ एक सहायक गतिविधि के रूप में देखा जा सकता है।

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