अम्बिकापुर और सरगुजा संभाग के दुर्गम वनांचलों में रहने वाले पहाड़ी कोरवा परिवारों के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राहत का एक बड़ा द्वार खोल दिया है। क्षेत्र में भीषण गर्मी के बीच गहराते पेयजल संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को तत्काल और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। सीएम साय ने स्पष्ट कहा है कि अंतिम व्यक्ति तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी कड़ी में सुदूर एवं पहाड़ी क्षेत्रों के लिए 113 नए हैंडपंप एवं बोरवेल की खुदाई की योजना को मंजूरी दी गई है, जिससे ग्रामीणों को अब मीलों दूर जाकर पारंपरिक जल स्रोतों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
सरगुजा जिले के इन सुदूर वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग लंबे समय से पीने के पानी के लिए झरिया और नालों पर आश्रित थे। मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता और कलेक्टर को दिए गए कड़े निर्देशों के बाद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) ने युद्ध स्तर पर काम शुरू कर दिया है। उन चिन्हित बसाहटों में मशीनें पहुंचाई जा रही हैं जहाँ भौगोलिक परिस्थितियों के कारण पहले बोरवेल करना कठिन माना जाता था। इस पहल से न केवल स्वच्छ पेयजल सुलभ होगा, बल्कि दूषित जल से होने वाली बीमारियों से भी ग्रामीणों को सुरक्षा मिलेगी।
मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी है कि किसी भी वनांचल या पहाड़ी कोरवा बसाहट में पानी की किल्लत की शिकायत नहीं मिलनी चाहिए। शासन की योजनाओं का लाभ उन क्षेत्रों तक पहुँचाना अनिवार्य है जो अब तक विकास की मुख्यधारा से अछूते रहे हैं। 113 नए हैंडपंपों की यह स्थापना उन परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगी जो सदियों से पानी के लिए संघर्ष कर रहे थे। प्रशासन अब नियमित रूप से इन खुदाई कार्यों की निगरानी कर रहा है ताकि समय सीमा के भीतर सभी बोरवेल शुरू हो सकें।






