Raipur: छत्तीसगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश भर की लाखों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बांटी गई साड़ियों में भारी गुणवत्ता और माप की कमी पाई गई है। कायदे से इन कार्यकर्ताओं को 5.5 मीटर की मानक लंबाई वाली साड़ियां दी जानी थीं, लेकिन आरोप है कि उन्हें केवल 5 मीटर की साड़ियां थमा दी गई हैं। लंबाई कम होने के कारण कार्यकर्ताओं को साड़ी पहनने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
धोने के बाद उतरा रंग, गुणवत्ता पर सवाल
मामला सिर्फ लंबाई तक सीमित नहीं है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि साड़ियों का कपड़ा इतना घटिया है कि पहली ही धुलाई में इनका रंग पूरी तरह उतर गया। सोशल मीडिया और विभागीय समूहों में इन साड़ियों की तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिसमें साड़ियों की बदहाली साफ देखी जा सकती है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार की ओर से मिलने वाली ड्रेस उनकी पहचान होती है, लेकिन इतनी घटिया सामग्री देकर विभाग ने उनके सम्मान के साथ खिलवाड़ किया है।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने लिया संज्ञान, दिए जांच के आदेश
इस गंभीर अनियमितता की खबरें जैसे ही सुर्खियों में आईं, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कड़ा रुख अपनाया है। मंत्री ने इस पूरे मामले में 'साड़ी घोटाले' की आशंका जताते हुए विभागीय अधिकारियों को उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि साड़ियों की खरीदी किस स्तर पर हुई, टेंडर की शर्तें क्या थीं और गुणवत्ता की जांच किए बिना इनका वितरण कैसे कर दिया गया, इन सभी बिंदुओं पर जवाबदेही तय की जाएगी।
भ्रष्टाचार की बू, दोषियों पर गिरेगी गाज
सूत्रों की मानें तो इस साड़ी खरीदी में लाखों-करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे होने की आशंका है। विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। मंत्री राजवाड़े ने आश्वासन दिया है कि यदि जांच में कोई अधिकारी या सप्लायर दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और भुगतान पर रोक लगाई जाएगी। फिलहाल, पूरे प्रदेश में इन साड़ियों के वितरण और स्टॉक की भौतिक जांच शुरू करने की तैयारी है।








