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Chhattisgarh UCC Consultation News: समान नागरिक संहिता पर दो दिवसीय मंथन, विवाह से विरासत तक मुद्दों पर संगठनों ने दिए सुझाव

Chhattisgarh 12 September 2026

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) के संभावित क्रियान्वयन से पहले राज्य स्तर पर गठित उच्च स्तरीय समिति ने विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और राज्य आयोगों के प्रतिनिधियों के साथ दो दिवसीय परामर्श बैठक की। पुराना सर्किट हाउस में 10 सितंबर से आयोजित बैठक में समिति के सदस्य एवं पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एम.के. राउत की अध्यक्षता में UCC के वर्तमान नियमों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार भी बैठक में मौजूद रहे।

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विवाह, तलाक और उत्तराधिकार पर हुई चर्चा

दो दिनों तक चले परामर्श सत्र में विवाह और तलाक, उत्तराधिकार एवं विरासत, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील विषयों पर विभिन्न पक्षों से सुझाव लिए गए। समिति ने सामाजिक और कानूनी पहलुओं को समझने के लिए प्रतिनिधियों के साथ विस्तार से चर्चा की।

गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति के प्रांतीय सचिव गजानंद नुरूटी ने आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने आदिवासी समुदाय की मौलिक पहचान और अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें UCC के दायरे से अलग रखने का अनुरोध किया।

लैंगिक समानता और संपत्ति अधिकार पर जोर

राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने महिला और पुरुष को समान अधिकार देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बेटे और बेटी को संपत्ति में समान उत्तराधिकार, विवाह एवं तलाक के अनिवार्य पंजीयन तथा संपत्ति और वसीयत से जुड़े स्पष्ट कानूनी प्रावधानों का सुझाव दिया।

क्रिश्चन समाज के प्रतिनिधि राजेश जॉन पाल सहित अन्य प्रतिनिधियों ने विवाह को धार्मिक दृष्टि से अटूट संबंध बताते हुए कहा कि उनके सामाजिक दृष्टिकोण में लिव-इन संबंधों को स्वीकार्यता नहीं है।

बच्चों के अधिकार और सामाजिक सुरक्षा पर भी सुझाव

राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने बच्चों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे। वहीं अधिवक्ता संघ के वरिष्ठ अधिवक्ता बृजेश पांडेय, अध्यक्ष दिनेश देवांगन, अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष प्रमोद तिवारी और वरिष्ठ उपाध्यक्ष भारती राठौर ने UCC के प्रावधानों को अधिक स्पष्ट, प्रभावी और पारदर्शी बनाने की जरूरत बताई।

दूसरे सत्र में कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष डॉ. सुरेश मिश्रा और आशीष बाजपेयी ने भी अपने विचार समिति के समक्ष रखे। मेडिकल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों डॉ. कुलदीप सोलंकी, डॉ. सुरभि दुबे और डॉ. के.पी. आजमानी ने भी UCC के क्रियान्वयन को लेकर सुझाव दिए।

सुझावों के आधार पर तैयार होगा मसौदा

समिति के सदस्यों ने सभी संगठनों और प्रतिनिधियों के सुझावों को गंभीरता से सुना। समिति की ओर से कहा गया कि विभिन्न सामाजिक समूहों से मिले व्यावहारिक सुझावों और तथ्यों का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। इसके आधार पर समावेशी, संतुलित और निष्पक्ष मसौदा तैयार करने की दिशा में आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

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