RRT News Raipur: छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर इन दिनों विकास और जन-कल्याण के क्षेत्र में सुशासन की एक नई और स्वर्णिम इबारत लिखी जा रही है। प्रदेश के संवेदनशील मुखिया मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुशल एवं दृढ़ नेतृत्व में राज्य सरकार जिस संवेदनशीलता, सेवा भाव और अटूट प्रतिबद्धता के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक विभिन्न शासकीय योजनाओं का सीधा लाभ पहुँचा रही है, वह बेहद सराहनीय है। यह कार्यप्रणाली न केवल प्रदेश की प्रशासनिक दक्षता और चुस्ती का एक बेजोड़ उदाहरण पेश कर रही है, बल्कि राज्य में सामाजिक न्याय, समानता और समावेशी विकास की एक अद्भुत मिसाल भी कायम कर रही है।
वर्तमान में संपूर्ण राज्य में बेहद उत्साह के साथ मनाया जा रहा ‘सुशासन तिहार’ (सुशासन उत्सव) दरअसल उस जनकल्याणकारी कल्पना का प्रत्यक्ष और जीवंत रूप है, जहाँ छत्तीसगढ़ की साय सरकार की पूरी प्रशासनिक मशीनरी स्वयं चलकर आम लोगों के दरवाजे और बस्तियों के बीच पहुँच रही है। अधिकारी न सिर्फ जनता की गंभीर और पुरानी समस्याओं को बेहद आत्मीयता से सुन रहे हैं, बल्कि मौके पर ही उनका त्वरित और ठोस समाधान कर उन्हें विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का एक सुनहरा अवसर भी प्रदान कर रहे हैं। इस अभियान ने सरकार और जनता के बीच की दूरी को पूरी तरह से पाट दिया है।
इसी जमीनी और क्रांतिकारी बदलाव की एक बेहद खूबसूरत और सजीव तस्वीर बिलासपुर के तालापारा में आयोजित विशेष 'समाधान शिविर' में देखने को मिली। इस शिविर में सैकड़ों की संख्या में पहुंचे स्थानीय नागरिकों, महिलाओं और वृद्धजनों की विभिन्न समस्याओं, जैसे- राशन कार्ड, पेंशन, पट्टा, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े आवेदनों का अधिकारियों ने मौके पर ही निराकरण किया। वर्षों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे लोगों के काम जब कुछ ही मिनटों में पूरे हुए, तो हितग्राहियों के चेहरे खुशी और नए विश्वास से खिल उठे। तालापारा का यह सफल शिविर यह साबित करता है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का सुशासन केवल फाइलों और नारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वनांचल और ग्रामीण छत्तीसगढ़ के आम नागरिकों के जीवन में नई उम्मीद और नई सुबह लेकर आया है।







