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छत्तीसगढ़ में घर-जमीन खरीदना हुआ सस्ता, सरकार ने खत्म किया रजिस्ट्री पर लगा उपकर (Cess)

छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने प्रदेशवासियों को बड़ी राहत देते हुए अचल संपत्ति (जमीन, मकान, दुकान) की रजिस्ट्री पर लगने वाले 0.60% उपकर (Cess) को पूरी तरह समाप्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन (20 मार्च 2026) को 'छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026' ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

इस फैसले का मुख्य उद्देश्य मध्यमवर्गीय परिवारों, किसानों और रीयल एस्टेट सेक्टर को आर्थिक मजबूती प्रदान करना है। वाणिज्यिक कर मंत्री ओपी चौधरी ने सदन में बताया कि इस निर्णय से लाखों लोगों को सीधा वित्तीय लाभ मिलेगा।
आम जनता की जेब पर क्या होगा असर? (एक उदाहरण)
रजिस्ट्री से 0.60% सेस हटने का मतलब है कि अब आपको बाजार मूल्य के आधार पर अतिरिक्त टैक्स नहीं देना होगा। इसे ऐसे समझें:
10 लाख की प्रॉपर्टी पर: लगभग ₹6,000 की बचत।
50 लाख की प्रॉपर्टी पर: लगभग ₹30,000 की बचत।
1 करोड़ की प्रॉपर्टी पर: सीधे ₹60,000 की बड़ी बचत।
(नोट: पूर्व में कांग्रेस सरकार द्वारा राजीव गांधी युवा मितान क्लब योजना के लिए लगाए गए 12% अतिरिक्त उपकर को भी इसी संशोधन के जरिए हटा दिया गया है, जिससे कुल रजिस्ट्री खर्च में काफी कमी आएगी।)
बजट और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
सरकार के इस कदम से राज्य के खजाने पर लगभग 150 करोड़ रुपये सालाना का अतिरिक्त भार पड़ेगा या राजस्व में इतनी कमी आएगी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि:
रजिस्ट्री में तेजी: टैक्स कम होने से लोग संपत्तियों का कानूनी पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहित होंगे, जिससे लंबे समय में रजिस्ट्री की संख्या बढ़ेगी।
रीयल एस्टेट को बूस्ट: घर खरीदारों की संख्या बढ़ने से निर्माण क्षेत्र में नई जान आएगी।
पारदर्शिता: शुल्क कम होने से अंडर-वैल्यूएशन (संपत्ति की कीमत कम दिखाना) के मामलों में कमी आएगी।
अन्य महत्वपूर्ण बदलाव
सरकार ने केवल सेस ही खत्म नहीं किया है, बल्कि पंजीयन शुल्क (Registration Fee) की व्यवस्था में भी सुधार किया है। अब पंजीयन शुल्क को केवल आपसी लेनदेन की कीमत के बजाय 'गाइडलाइन मूल्य' से भी जोड़ा गया है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों को धोखाधड़ी से बचने और सही दाम पर रजिस्ट्री कराने में आसानी होगी।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ सरकार का यह फैसला 'ईज ऑफ लिविंग' (Ease of Living) की दिशा में एक बड़ा कदम है। जहां एक तरफ पड़ोसी राज्यों में रजिस्ट्री शुल्क बढ़ रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ में इसे सस्ता करना निवेश को आकर्षित करने और आम आदमी के 'अपने घर' के सपने को सच करने में मदद करेगा।







