RRT News- छत्तीसगढ़ में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सरकार ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के प्रमुख संस्थानों—होटल, शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल और बड़ी आवासीय कॉलोनियों—को अपने कचरे का प्रबंधन खुद सुनिश्चित करना होगा। नगर निगम और स्थानीय निकायों पर कचरे के बोझ को कम करने के लिए सरकार ने इन संस्थानों को 'बल्क वेस्ट जेनरेटर' (Bulk Waste Generators) के रूप में वर्गीकृत करने का निर्णय लिया है।
किसे और क्या करना होगा?
नए नियमों के तहत, जो संस्थान प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न करते हैं, उन्हें अब नगर निगम की गाड़ी के भरोसे बैठने के बजाय खुद कचरा प्रसंस्करण (Waste Processing) की व्यवस्था करनी होगी। इसमें शामिल हैं:
होटल और रेस्तरां: जैविक और अजैविक कचरे का वर्गीकरण (Segregation) अनिवार्य।
शैक्षणिक संस्थान: स्कूलों और कॉलेजों को अपने परिसर में कंपोस्टिंग यूनिट लगानी पड़ सकती है।
अस्पताल: बायो-मेडिकल वेस्ट के साथ-साथ सामान्य कचरे का भी सही प्रबंधन।
आवासीय कॉलोनियां: सोसायटियों को खुद ही कचरे के निपटान के लिए खाद बनाने (Composting) की व्यवस्था करनी होगी।
सरकार का उद्देश्य—'क्लीन सिटी' का सपना
प्रशासन का मानना है कि कचरा प्रबंधन को विकेंद्रीकृत (Decentralize) करने से शहरों में लैंडफिल साइट्स (कचरा डंपिंग ग्राउंड) पर दबाव कम होगा। अब तक जो कचरा शहर की सड़कों और डंपिंग यार्ड्स में जमा हो जाता था, उसे सोर्स पर ही खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
रायपुर जैसे बढ़ते हुए शहरों में कचरे का निस्तारण एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस नए नियम से न केवल शहरों की सूरत बदलेगी, बल्कि यह पर्यावरण के लिहाज से भी एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।
आमजन और संस्थानों के लिए चुनौती:
नियम तो लागू कर दिए गए हैं, लेकिन अब इन संस्थानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे तय समय सीमा में अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव कैसे लाते हैं। क्या ये संस्थान अपनी जिम्मेदारी समझकर इसे लागू करेंगे, या फिर प्रशासन को सख्ती दिखानी पड़ेगी? यह देखना दिलचस्प होगा।







