छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार द्वारा नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे के लिए तय की गई 31 मार्च 2026 की डेडलाइन खत्म होने से कुछ ही घंटे पहले 11 सक्रिय नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। दंतेवाड़ा, सुकमा और कांकेर जिलों में फैले इस नेटवर्क के टूटने से अब बस्तर संभाग के बड़े हिस्से को 'नक्सल मुक्त' घोषित करने की राह आसान हो गई है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों में कई इनामी कैडर भी शामिल हैं, जिन्होंने AK-47, इंसास राइफल और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री पुलिस को सौंपी है।
उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस सफलता पर सुरक्षाबलों को बधाई देते हुए कहा कि "बंदूक की लड़ाई अब हार चुकी है।" उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों में 'पून नार्कोम' (नई सुबह) जैसे अभियानों के कारण नक्सलियों का संगठन के प्रति मोहभंग हुआ है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, दंतेवाड़ा और कोंडागांव जैसे जिले अब लगभग 99% नक्सल मुक्त हो चुके हैं। सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने स्वीकार किया कि वे संगठन की खोखली विचारधारा और पुलिस के बढ़ते दबाव के कारण मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि हथियारों और गोला-बारूद की बरामदगी है। पुलिस ने आत्मसमर्पित नक्सलियों की निशानदेही पर जंगलों में छिपे कई 'डंप' (हथियारों के जखीरे) भी बरामद किए हैं। प्रशासन ने घोषणा की है कि जो गांव पूरी तरह हिंसा मुक्त होंगे, उन्हें विकास कार्यों के लिए 1 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। अब बस्तर के उन दुर्गम इलाकों में, जहाँ कभी गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, वहां स्कूल, अस्पताल और सुविधा केंद्र खोलने की तैयारी शुरू कर दी गई है।








