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जंबूरी पर 'भ्रष्टाचार' का साया: राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी में 10 करोड़ की गड़बड़ी का आरोप, कांग्रेस पहुंची EOW

Chhattisgarh RRT News Desk 07 January 2026

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रायपुर/बालोद: छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित हो रही 'राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी' शुरू होने से पहले ही विवादों के घेरे में आ गई है। भारत स्काउट एवं गाइड के इस प्रतिष्ठित आयोजन में लगभग 10 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता और नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगे हैं। मुख्य विवाद आयोजन स्थल को नवा रायपुर से बदलकर रातों-रात बालोद के ग्राम दुधली (डौंडीलोहारा) स्थानांतरित करने और बिना टेंडर के करोड़ों के काम कराने को लेकर खड़ा हुआ है।

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विपक्ष (कांग्रेस) ने इस मामले में सीधे स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और विभाग के आला अधिकारियों पर निशाना साधा है। कांग्रेस का आरोप है कि चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुँचाने के लिए न केवल वेन्यू बदला गया, बल्कि बजट की राशि को नियमों के विरुद्ध स्काउट-गाइड के खाते के बजाय बालोद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया। इस मामले में कांग्रेस ने EOW (आर्थिक अपराध शाखा) और ACB में शिकायत दर्ज कर एफआईआर की मांग की है।

विवाद के मुख्य बिंदु:

स्थल परिवर्तन: आयोजन पहले नवा रायपुर में होना तय था, लेकिन इसे अचानक बालोद शिफ्ट कर दिया गया। आरोप है कि यह निर्णय परिषद को अंधेरे में रखकर लिया गया।

बिना टेंडर काम: सोशल मीडिया और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, करोड़ों रुपये के डोम, टेंट और आवासीय ब्लॉक का काम टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही जमीन पर पूरा कर लिया गया।

राशि का स्थानांतरण: स्कूल शिक्षा विभाग ने 10 करोड़ का बजट यह तर्क देकर DEO खाते में भेजा कि स्काउट गाइड के पास जेम (GeM) पोर्टल की सुविधा नहीं है, जिसे वित्तीय नियमों का उल्लंघन बताया जा रहा है।

निविदा निरस्त: सूत्रों के अनुसार, निविदा प्रक्रिया में इतनी खामियां पाई गईं कि मुख्य सचिव को हस्तक्षेप कर पहली निविदा निरस्त करनी पड़ी।

इस पूरे प्रकरण पर भारत स्काउट एवं गाइड के राज्य मुख्य आयुक्त इंदर जीत सिंह खालसा ने अनभिज्ञता जताई है। उनका कहना है कि वेन्यू का निर्णय राज्य कार्यकारिणी ने लिया था। वहीं, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने हाल ही में आयोजन स्थल का निरीक्षण कर तैयारियों को संतोषजनक बताया है।

9 जनवरी से शुरू होने वाले इस 5 दिवसीय आयोजन में देशभर से हजारों स्काउट्स और गाइड्स के पहुँचने की उम्मीद है, लेकिन भ्रष्टाचार के इन आरोपों ने सरकार और विभाग की साख पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जानकारों का मानना है कि यदि जांच तेज हुई, तो आयोजन के दौरान या उसके ठीक बाद विभाग के कई बड़े अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।

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