Breaking
- Ola Electric Notice in Chhattisgarh: ओला इलेक्ट्रिक के 3,000 वाहनों का पंजीयन...
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रायपुर में नुआखाई महोत्सव के 'सेवा सम्मान पर्व' ...
- आपसी विवाद में खूनी संघर्ष, चाकूबाजी में एक युवक की मौत और दूसरा घायल, आरोपी ...
- Chhattisgarh Weather Update: छत्तीसगढ़ में लुढ़का पारा, अंबिकापुर में न्यूनतम...
- छत्तीसगढ़ के नगर सैनिकों को मिलने जा रहा बड़ा तोहफा, अब बढ़कर 30,870 रुपये हो...
- उद्घाटन से पहले ही रायपुर-विशाखापत्तनम भारतमाला हाईवे में पड़ी दरारें, गुणवत्...
- Mata Hasi Devi 200th Jayanti: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रायपुर में जारी कि...
- दीपावली से पहले मिठाइयों की दुकानों पर खाद्य विभाग का छापा, फ्रीजर बंद मिलने ...
- Courtesy Meeting: राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मुख्यमंत्री वि...
- बस्तर के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में 12 दिन पहले शुरू हुआ सफारी सत्र, पर...
CG में बड़ा दवा घोटाला! एमपी में ब्लैकलिस्टेड कंपनी से छत्तीसगढ़ में हर महीने हो रही 6 करोड़ की खरीदी; अमानक सप्लाई पर भी अफसर मेहरबान

रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य महकमे से एक बेहद चौंकाने वाला और मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाला बड़ा मामला सामने आया है। पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में घटिया और अमानक (सब-स्टैंडर्ड) दवाइयों की सप्लाई करने के आरोप में तीन साल के लिए प्रतिबंधित (ब्लैकलिस्ट) की गई दवा निर्माता कंपनी 'यूनिकेयर इंडिया लिमिटेड' पर छत्तीसगढ़ के जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह मेहरबान हैं। इस ब्लैकलिस्टेड कंपनी से छत्तीसगढ़ में अब भी हर महीने लगभग 6 करोड़ रुपये की दवाइयों की भारी-भरकम खरीदी धड़ल्ले से जारी है।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा जारी एक कड़ा आदेश सामने आया। दरअसल, गुणवत्ता परीक्षण (क्वालिटी टेस्ट) के दौरान इस कंपनी द्वारा बनाई गई दवाइयों के लगातार तीन बैच पूरी तरह फेल पाए गए थे। इसके बाद मध्यप्रदेश सरकार ने त्वरित एक्शन लेते हुए 8 मई 2026 को इस कंपनी को अगले तीन वर्षों के लिए पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया था। कंपनी पर शासकीय अस्पतालों में सप्लाई की जाने वाली 'लैक्टुलोज' (Lactulose) दवा के बेहद घटिया और अमानक बैच उपलब्ध कराने का गंभीर आरोप प्रमाणित हुआ था।
नियमों के मुताबिक, यदि कोई कंपनी किसी पड़ोसी या अन्य राज्य में गुणवत्ता विहीन दावों के कारण ब्लैकलिस्ट होती है, तो अन्य राज्यों को भी एहतियात के तौर पर उसके टेंडर और अनुबंध की समीक्षा करनी होती है। लेकिन छत्तीसगढ़ में इसके ठीक विपरीत, जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें मूंद रखी हैं और अमानक दवा सप्लाई के इस गंभीर इनपुट के बाद भी कंपनी का करोड़ों रुपये का पुराना अनुबंध निरस्त नहीं किया गया है। सरकारी अस्पतालों में आने वाले गरीब मरीजों को इन्हीं संदिग्ध दवाओं की सप्लाई होने की आशंका बनी हुई है, जिससे अब राज्य के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।







