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छत्तीसगढ़ का 'सफ़ेद सोना': नेशनल मखाना बोर्ड में शामिल होने और 'दाऊजी ब्रांड' के संघर्ष की गौरवगाथा

RRT News- छत्तीसगढ़ के कृषि इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। हाल ही में धमतरी में आयोजित किसान सम्मान निधि कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य को 'राष्ट्रीय मखाना बोर्ड' में शामिल करने की ऐतिहासिक घोषणा की। यह केवल एक सरकारी फैसला नहीं है, बल्कि पिछले दो दशकों से राज्य के वैज्ञानिकों और किसानों द्वारा किए गए अथक परिश्रम का राष्ट्रीय सम्मान है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को बिहार के बाद देश के सबसे बड़े मखाना हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी, जिससे आने वाले समय में राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आने तय हैं।

इस पूरी सफलता के सूत्रधार इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. गजेंद्र चंद्राकर हैं, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी मखाना की खेती को एक नई पहचान दी। साल 2016 में धमतरी से शुरू हुआ यह प्रयोग बीच में लगभग थम सा गया था, लेकिन डॉ. चंद्राकर ने अपने पैतृक गांव लिगाडीह (आरंग) में 15 एकड़ की जमीन पर खुद शोध जारी रखा। उन्होंने तमाम पारिवारिक चुनौतियों और वित्तीय बाधाओं के बावजूद बैंक से ऋण लेकर ₹1.35 करोड़ की लागत से प्रदेश का पहला मखाना प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित किया। अपने पिता की स्मृति में शुरू किया गया उनका ब्रांड 'दाऊजी मखाना' आज बाजार में अपनी गुणवत्ता और आकार के कारण व्यापारियों की पहली पसंद बन चुका है।
मखाना उत्पादन को दोबारा जीवित करने में धमतरी जिला प्रशासन और कलेक्टर श्री अविनाश मिश्रा की भूमिका भी बेहद सराहनीय रही है। प्रशासनिक समन्वय के जरिए राखी और सरसोपुरी जैसे गांवों के अनुपयोगी व खरपतवार से भरे तालाबों को साफ कर वहां मखाना उगाया गया। डॉ. चंद्राकर और उनकी वैज्ञानिक टीम ने न केवल रिकॉर्ड उत्पादन किया, बल्कि ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को भी इस तकनीक से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया। प्रशासन की सक्रियता से अब अलग-अलग विभागों को एक साथ लाकर मखाना उत्पादन को एक जन-आंदोलन का रूप दिया जा रहा है, जिससे खेती के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
भविष्य की योजनाओं पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ अब मखाना क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार है। वर्ष 2025-26 के लिए धमतरी में मखाना खेती का दायरा 200 एकड़ तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य के नेशनल मखाना बोर्ड में शामिल होने से अब किसानों को आधुनिक मशीनरी, बेहतर सब्सिडी और अंतरराष्ट्रीय स्तर का बाजार आसानी से उपलब्ध होगा। मत्स्य पालन समितियों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को इस अभियान से जोड़कर छत्तीसगढ़ को देश का दूसरा सबसे बड़ा मखाना उत्पादक केंद्र बनाने का सपना अब हकीकत में तब्दील हो रहा है।







