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सहूलियत, सम्मान और सेहत... जल जीवन मिशन ने बदली बस्तर की कमली जैसी हजारों महिलाओं की जिंदगी, डिप्टी सीएम अरुण साव ने देखा जमीनी बदलाव

Chhattisgarh RRT News Desk 10 June 2026

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RRT News Bastar: रोज सुबह उठते ही घर के आंगन में लगे नल से साफ और शुद्ध पानी आते देखने की खुशी क्या होती है, इसे बस्तर की कमली से बेहतर कोई नहीं समझ सकता। बीते दिनों जब प्रदेश के उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) मंत्री अरुण साव अपने चार दिवसीय बस्तर प्रवास के दौरान तोकापाल विकासखण्ड के सुदूर ग्रामीण अंचल दुगनपाल पहुंचे, तो कमली ने बड़े ही उत्साह के साथ अपने घर के आंगन में लगे नल से आ रहे पानी की धार उन्हें दिखाई। नल से बहते स्वच्छ पानी को दिखाते हुए खुशी और संतोष के मारे कमली की आंखें डबडबा गईं। यह भावुक क्षण इस बात का गवाह है कि केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'जल जीवन मिशन' योजना ने वनांचल की कमली जैसी हजारों-लाखों ग्रामीण महिलाओं को जीवन की सबसे अमूल्य और बुनियादी खुशी दी है।

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डिप्टी सीएम अरुण साव ने अपने बस्तर प्रवास के दौरान दुगनपाल गांव के कई अन्य घरों में भी जाकर सीधे नल से पानी की आपूर्ति का जमीनी निरीक्षण किया। हर घर में नल से पानी पहुंचने की जो आत्मसंतुष्टि और खुशी थी, वह साफ तौर पर ग्रामीण महिलाओं के चेहरों पर चमक रही थी। परंपरागत रूप से भारतीय ग्रामीण परिवेश में पीने और निस्तारी के पानी के इंतजाम का पूरा जिम्मा महिलाओं के कंधों पर ही होता है। वनांचलों और दूरस्थ गांवों में आधी आबादी के एक बड़े हिस्से को रोज पानी के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता था। विशेषकर भीषण गर्मी के दिनों में जब स्थानीय जलस्रोत सूख जाते थे, तो सिर पर बर्तनों का बोझ उठाकर पानी लाने का सफर कुछ सौ मीटर से बढ़कर कई किलोमीटर तक लंबा हो जाता था, जिससे महिलाओं की दिनचर्या बेहद दुष्कर और श्रमसाध्य हो जाती थी।

जल जीवन मिशन केवल हर घर तक पाइपलाइन बिछाने की योजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं को सहूलियत, सामाजिक सम्मान और बेहतर सेहत की सौगात दे रही है। घर पर ही बारह महीने शुद्ध पेयजल मिलने से अब महिलाओं का काफी समय और शारीरिक श्रम बच रहा है, जिसका उपयोग वे अपने बच्चों की परवरिश, खेती-बाड़ी, घरेलू काम और आजीविका के नए रास्ते तलाशने में कर पा रही हैं। इसके साथ ही, इस मिशन ने सेहत के बड़े खतरों को भी टाल दिया है; क्योंकि पहले बरसात में दूषित पानी और गर्मियों में गुणवत्ताहीन जल के उपयोग से ग्रामीणों को पेट और त्वचा संबंधी गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ता था। छत्तीसगढ़ में अब तक साढ़े आठ हजार से अधिक ऐसी नल-जल योजनाओं को पूरी तरह से मुकम्मल कर संचालन के लिए ग्राम पंचायतों को सौंपा जा चुका है, जो राज्य में सुशासन और ग्रामीण विकास की एक नई इबारत लिख रहा है।

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