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55 की उम्र में माता-पिता बनने का रास्ता साफ: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने IVF को दी बड़ी राहत

Chhattisgarh 26 April 2026 (29)

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RRT News- बिलासपुर  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में 55 वर्षीय दंपति को इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) के माध्यम से माता-पिता बनने की अनुमति प्रदान की है। यह मामला उस समय चर्चा में आया जब दंपति ने अपनी उम्र के कारण मेडिकल सहायता लेने में कानूनी बाधाओं का सामना किया था। अदालत ने इस मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए दंपत्ति के प्रजनन के अधिकार को प्राथमिकता दी है, जो भारतीय कानूनी ढांचे में एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है।

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इस मामले में मुख्य चुनौती असिस्टेंट रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) विनियमन कानून से जुड़ी थी, जिसमें अक्सर उम्र सीमा को लेकर सख्त दिशा-निर्देश होते हैं। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि संतान सुख प्राप्त करना उनका मौलिक अधिकार है और इसे केवल उम्र के आधार पर नहीं रोका जा सकता। हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए माना कि किसी भी व्यक्ति के माता-पिता बनने के अधिकार को केवल वैधानिक सीमाओं के आधार पर पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता, यदि मेडिकल फिटनेस मौजूद हो।

यह फैसला उन अन्य जोड़ों के लिए एक नई उम्मीद की किरण बनकर उभरा है जो देर से माता-पिता बनने का निर्णय लेते हैं या किसी कारणवश उम्र के पड़ाव पर आकर चिकित्सा सहायता लेने की योजना बनाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का यह निर्णय भविष्य में प्रजनन अधिकारों से संबंधित कानूनी व्याख्याओं में एक मिसाल के तौर पर देखा जाएगा। यह स्पष्ट करता है कि तकनीक और न्याय का संतुलन बनाते समय व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पारिवारिक खुशियों को भी उचित स्थान दिया जाना चाहिए।

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