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- छत्तीसगढ़ में ‘हरेली बर्ड फेस्टिवल 2026’ का सफल समापन, 33 जिलों में दर्ज हुईं...
छत्तीसगढ़ में ‘हरेली बर्ड फेस्टिवल 2026’ का सफल समापन, 33 जिलों में दर्ज हुईं 211 पक्षी प्रजातियां

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पर्यावरण, प्रकृति और जैव विविधता के संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय ‘हरेली बर्ड फेस्टिवल 2026’ का सफल समापन हो गया। 14 से 16 अगस्त तक चले इस आयोजन में प्रदेश के सभी 33 जिलों में पक्षी अवलोकन गतिविधियां आयोजित की गईं। अभियान का उद्देश्य पक्षियों की विविधता का दस्तावेजीकरण करने के साथ नागरिकों में प्रकृति और पक्षी संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।

33 जिलों में 45 बर्ड वॉक, 1,000 से अधिक लोगों ने लिया हिस्सा
हरेली बर्ड फेस्टिवल के दौरान प्रदेशभर में कुल 45 बर्ड वॉक आयोजित किए गए, जिनमें 1,000 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कोपरा जलाशय, चिच्छा वेटलैंड, बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य, अचानकमार टाइगर रिजर्व और नंदनवन जंगल सफारी सहित कई महत्वपूर्ण वन एवं आर्द्रभूमि क्षेत्रों में पक्षियों का सर्वे किया गया। नंदनवन जंगल सफारी में दिव्यांगजनों के लिए विशेष बर्ड वॉक भी आयोजित किया गया।
954 चेकलिस्ट में 211 पक्षी प्रजातियां दर्ज
नागरिक विज्ञान मंच eBird के माध्यम से जुटाए गए आंकड़ों में छत्तीसगढ़ की समृद्ध पक्षी विविधता सामने आई। तीन दिनों में कुल 954 eBird चेकलिस्ट तैयार की गईं, जिनमें 211 पक्षी प्रजातियों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया। इनमें पेंटेड स्टॉर्क, रेड-नेप्ड आइबिस, कॉटन पिग्मी-गूज, इंडियन पैराडाइज फ्लाईकैचर और ग्रेटर रैकेट-टेल्ड ड्रोंगो जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियां शामिल रहीं।
पक्षी संरक्षण के साथ आजीविका को भी बढ़ावा
यह आयोजन केवल पक्षी अवलोकन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्थानीय समुदायों और आजीविका से भी जोड़ा गया। रायपुर जिले के मांढर स्थित अड़बंधा तालाब में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने भागीदारी की। कलश स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित फूड कार्ट स्थानीय समुदाय, आजीविका और प्रकृति संरक्षण के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण बना।
आगे और मजबूत होंगे संरक्षण प्रयास
हरेली बर्ड फेस्टिवल से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग भविष्य में महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों की नियमित निगरानी और पक्षी संरक्षण गतिविधियों को मजबूत करने में किया जाएगा। साथ ही ‘पक्षी मित्र’ नेटवर्क को विस्तार देने तथा स्कूलों और स्थानीय समुदायों के बीच पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।







