छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक किसान का गुस्सा फूट पड़ा। छुरिया तहसील कार्यालय में उस समय हड़कंप मच गया जब एक किसान लोहे की जंजीर और ताला लेकर पहुँचा और खुद को कार्यालय के मुख्य दरवाजे से बांधकर लॉक कर लिया। किसान का आरोप है कि उसके जायज काम के लिए कार्यालय का बाबू लंबे समय से रिश्वत की मांग कर रहा है और पैसे न देने पर उसे बार-बार दौड़ाया जा रहा है।
पीड़ित किसान का कहना है कि वह अपनी जमीन से जुड़े किसी राजस्व कार्य (जैसे नामांतरण या सीमांकन) के लिए पिछले कई महीनों से तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहा है। आरोप है कि संबंधित लिपिक (बाबू) ने काम करने के बदले मोटी रकम की मांग की। आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसान ने जब रिश्वत देने में असमर्थता जताई, तो उसका काम अटका दिया गया। बार-बार की प्रताड़ना से तंग आकर किसान ने गांधीवादी तरीके से लेकिन कड़ा विरोध जताने का फैसला किया।
तपती धूप में जंजीरों से बंधे किसान को देखकर वहां लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। इस नाटकीय विरोध प्रदर्शन ने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुँचे। अधिकारियों ने किसान को समझाने और ताला खोलने की काफी कोशिश की, लेकिन किसान इस बात पर अड़ा रहा कि जब तक दोषी कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होती और उसका काम पूरा नहीं होता, वह वहां से नहीं हटेगा।
किसान के इस कदम ने सोशल मीडिया पर भी हलचल पैदा कर दी है। लोग वीडियो और तस्वीरें साझा कर सरकार के 'सुशासन' के दावों पर सवाल उठा रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दफ्तरों में बाबू राज इस कदर हावी है कि बिना 'सेवा शुल्क' दिए आम आदमी का कोई भी काम समय पर नहीं होता। इस घटना ने एक बार फिर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
काफी जद्दोजहद के बाद, प्रशासन ने किसान को निष्पक्ष जांच और तत्काल काम पूरा करने का लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद ही उसने ताला खोला। तहसीलदार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित लिपिक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। इस घटना ने पूरे प्रदेश में चर्चा छेड़ दी है कि क्या एक गरीब किसान को अपना हक पाने के लिए इसी तरह के आत्मघाती कदम उठाने होंगे।



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