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छत्तीसगढ़ में ठंड का तांडव: 22 दिन में दूसरी मौत, पैरावट में मिली बुजुर्ग की लाश; हाइपोथर्मिया बना काल...

Chhattisgarh RRT News Desk 02 January 2026

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छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड अब जानलेवा साबित होने लगी है। राज्य में पिछले 22 दिनों के भीतर ठंड से मौत का यह दूसरा मामला सामने आया है। ताजा घटना में एक बुजुर्ग की जान हाइपोथर्मिया (शरीर का तापमान सामान्य से कम होना) के कारण चली गई। बुजुर्ग का शव एक खेत के पैरावट (पैरा के ढेर) में मिला, जहाँ उन्होंने ठंड से बचने के लिए शरण ली थी। इस घटना ने प्रदेश में पड़ रही भीषण ठंड और बेघरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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मृतक की पहचान एक स्थानीय ग्रामीण के रूप में हुई है, जो रात के समय घर नहीं लौट सके थे। शुरुआती जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, अत्यधिक ठंड के कारण उनके शरीर के अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। डॉक्टरों का कहना है कि जब शरीर का तापमान 35°C (95°F) से नीचे चला जाता है, तो हाइपोथर्मिया की स्थिति बनती है, जो बुजुर्गों और बच्चों के लिए घातक हो सकती है। इससे पहले भी प्रदेश में एक व्यक्ति की मौत ठंड के कारण हो चुकी है।

मौसम विभाग (IMD) ने छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में अगले 2 दिनों तक बारिश की चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण आसमान में बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। बारिश के बाद न्यूनतम तापमान में और गिरावट आने की संभावना है, जिससे कनकनी और बढ़ेगी। सरगुजा और बस्तर संभाग के जिलों में 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है, जहाँ पारा 5 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है।

बढ़ती ठंड को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सार्वजनिक स्थानों पर अलाव (Bonfire) जलाने और रैन बसेरों में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी कर लोगों को सलाह दी है कि वे रात के समय बाहर निकलने से बचें और पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में जहाँ लोग खेतों में काम करते हैं, उन्हें अधिक सावधानी बरतने को कहा गया है क्योंकि खुले स्थानों पर शीत लहर का प्रभाव सबसे अधिक होता है।

राज्य के उत्तरी जिलों जैसे अंबिकापुर, जशपुर और कोरिया में पारा लगातार गिर रहा है। कई स्थानों पर सुबह घना कोहरा देखा जा रहा है, जिससे दृश्यता (Visibility) कम हो गई है और सड़क यातायात प्रभावित हो रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि अगले 48 घंटों में बारिश होती है, तो नमी बढ़ने के कारण ठिठुरन और भी अधिक बढ़ जाएगी, जिससे जनजीवन और अधिक प्रभावित हो सकता है।

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