छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने दस्तक दे दी है, जिससे प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बलरामपुर जिले में गिरते तापमान और ठंडी हवाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों में छोटे बच्चों के लिए छुट्टी की घोषणा कर दी है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले तीन दिनों तक उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के जिलों में तीव्र शीतलहर (Cold Wave) चलने की संभावना है, जिससे तापमान में और गिरावट आ सकती है।
सरगुजा संभाग के जिलों, जिनमें अंबिकापुर, बलरामपुर, और सूरजपुर शामिल हैं, वहां प्रशासन ने घने कोहरे का अलर्ट जारी किया है। सुबह के समय विजिबिलिटी (दृश्यता) काफी कम होने के कारण यातायात पर बुरा असर पड़ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर से आ रही बर्फीली हवाओं ने मैदानी इलाकों में ठिठुरन बढ़ा दी है। बलरामपुर के कलेक्टर ने बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए स्कूलों के समय में बदलाव या अवकाश के निर्देश जारी किए हैं ताकि उन्हें इस भीषण ठंड से बचाया जा सके।
रायपुर मौसम केंद्र के मुताबिक, केवल सरगुजा ही नहीं बल्कि बिलासपुर और दुर्ग संभाग के कुछ हिस्सों में भी न्यूनतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। राजधानी रायपुर समेत मध्य छत्तीसगढ़ में भी रात के तापमान में कमी आई है। मौसम विभाग ने अगले 72 घंटों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी करते हुए लोगों को सुबह और देर रात अनावश्यक बाहर न निकलने की सलाह दी है। विशेष रूप से बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह मौसम काफी संवेदनशील बताया जा रहा है।
ठंड के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए नगर निगम और जिला प्रशासन ने चौक-चौराहों पर अलाव की व्यवस्था शुरू कर दी है। रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों पर रैन बसेरों को सक्रिय कर दिया गया है ताकि बेघर लोगों को ठंड से राहत मिल सके। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को भी सलाह दी है कि वे पाला (Frost) पड़ने की स्थिति में अपनी फसलों, विशेषकर सब्जियों और दलहन की सुरक्षा के लिए उचित उपाय करें। कोहरे के कारण लंबी दूरी की ट्रेनों और उड़ानों के समय में भी देरी होने की खबरें मिल रही हैं।
आने वाले एक सप्ताह तक छत्तीसगढ़ के मौसम में बड़े सुधार की उम्मीद नहीं है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और उत्तर की ठंडी हवाओं के मिलन से कुछ स्थानों पर बादल छाए रह सकते हैं, जिससे दिन के तापमान में भी गिरावट आएगी। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और अन्य प्रभावित जिलों में भी स्कूलों की छुट्टियों को लेकर स्थानीय स्तर पर फैसला लिया जा सकता है। फिलहाल, पूरा प्रदेश शीतलहर की चपेट में है और लोग गर्म कपड़ों तथा अलाव का सहारा ले रहे हैं।








