CG News- छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य बस्तर जिले के जगदलपुर क्षेत्र से धर्मांतरण और वन भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। यहाँ की पिपलावंड ग्राम पंचायत में बड़े पैमाने पर हुए धर्म परिवर्तन की घटना से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश और नाराजगी देखने को मिल रही है। विवाद तब और गहरा गया जब धर्मांतरित परिवारों द्वारा गांव की पारंपरिक वन भूमि (जंगल की जमीन) पर कथित रूप से कब्जा कर चर्च (प्रार्थना स्थल) बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई। ग्रामीणों द्वारा बार-बार मना किए जाने और रोकने के बाद भी जब वे नहीं माने, तो पूरा मामला प्रशासनिक चौखट तक पहुंच गया।
65 परिवारों के 300 लोगों ने बदला धर्म, सामाजिक ताने-बाने पर संकट
पिपलावंड पंचायत के सैकड़ों ग्रामीण गुरुवार को एकजुट होकर सीधे कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। ग्रामीणों ने चौंकाने वाला दावा किया है कि पंचायत के लगभग 65 परिवारों के 300 से ज्यादा लोगों ने अपना मूल धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस सामूहिक धर्म परिवर्तन के बाद से ये परिवार गांव की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, सदियों पुराने रीति-रिवाजों और संस्कृति से पूरी तरह अलग हो गए हैं, जिससे गांव का आपसी सौहार्द और ताना-बाना बिगड़ रहा है।
पारंपरिक आयोजनों से दूरी और अवैध निर्माण पर ग्रामीणों की चेतावनी
सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि ईसाई धर्म अपनाने वाले ये लोग अब गांव में होने वाले पारंपरिक धार्मिक कार्यक्रमों, सामाजिक आयोजनों और सामुदायिक गतिविधियों में पहले की तरह हिस्सा नहीं ले रहे हैं। इसके विपरीत, वे गांव की वन भूमि पर अवैध निर्माण करने पर आमादा हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि आदिवासियों की संस्कृति के साथ हो रहे इस खिलवाड़ और जंगल की जमीन पर अवैध कब्जे को तुरंत नहीं रोका गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और उग्र हो सकती है। कलेक्ट्रेट अधिकारियों ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए त्वरित जांच और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया है।







