रायपुर। छत्तीसगढ़ में राजस्व प्रशासन तेजी से डिजिटल बदलाव की ओर बढ़ रहा है। राज्य सरकार द्वारा लागू ऑटो म्यूटेशन (स्वतः नामांतरण) और ऑटो डायवर्सन (स्वतः व्यवर्तन) जैसी तकनीक आधारित व्यवस्थाओं ने जमीन से जुड़े कार्यों को पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, पारदर्शी और सरल बना दिया है। इन सुधारों से आम नागरिकों को बार-बार तहसील और राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिली है।
राजस्व विभाग के अनुसार, अब तक राज्य में 1,40,607 पंजीकृत विलेखों में से 1,40,536 मामलों का सफल ऑटो म्यूटेशन किया जा चुका है। केवल 71 प्रकरण लंबित हैं, जिससे 99.95 प्रतिशत की सफलता दर दर्ज की गई है।
वहीं ऑटो डायवर्सन व्यवस्था के तहत 5,661 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 4,739 मामलों का निराकरण किया गया। इस प्रकार विभाग ने 83.71 प्रतिशत प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण कर भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया है।
कोरिया जिला बना नंबर-1
ऑटो डायवर्सन के क्रियान्वयन में कोरिया जिला 100 प्रतिशत सफलता के साथ पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। इसके अलावा कोरबा, मुंगेली, बालोद और धमतरी भी शीर्ष प्रदर्शन करने वाले जिलों में शामिल रहे। धमतरी ने 92.73 प्रतिशत सफलता दर के साथ टॉप-5 में जगह बनाई।
तकनीक से बढ़ी पारदर्शिता
राजस्व विभाग ने NGDRS API Integration के माध्यम से गाइडलाइन दरों के आधार पर प्रीमियम निर्धारण को पूरी तरह डिजिटल बनाया है। इसके अलावा 'मल्टीपल खसरा', 'Diverted to Diverted' और 'रिकवरी मॉड्यूल' जैसे नए डिजिटल मॉड्यूल भी विकसित किए जा रहे हैं। इनसे एक ही आवेदन में कई खसरों का चयन, स्वतः शुल्क गणना, ई-चालान और लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
डिजिटल राजस्व व्यवस्था की ओर बड़ा कदम
राज्य सरकार दिसंबर 2026 तक सैटेलाइट और ड्रोन आधारित मैपिंग, टीएनसीपी से एनओसी लिंकिंग तथा भू-अभिलेख पोर्टल के व्यापक अपग्रेडेशन की तैयारी कर रही है। इन पहलों का उद्देश्य जमीन संबंधी सभी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है।








