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43 साल बाद अमेरिका में मिली छत्तीसगढ़ की 19 करोड़ की 'अवलोकितेश्वर' मूर्ति, पर वापसी के दावों को दीमक ने किया खोखला

आज विश्व संग्रहालय दिवस है, और इस खास मौके पर छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। साल 1875 में स्थापित देश के सबसे पुराने संग्रहालयों में से एक, महंत घासीदास संग्रहालय से वर्ष 1982 में चोरी हुई 7वीं शताब्दी की बेशकीमती और दुर्लभ बौद्ध कांस्य प्रतिमा ‘अवलोकितेश्वर’ आखिरकार 43 साल बाद अमेरिका में मिल गई है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में लगभग 19 करोड़ रुपये (20 लाख डॉलर) आंकी गई इस ऐतिहासिक मूर्ति की घर वापसी के लिए छत्तीसगढ़ के संस्कृति मंत्री ने केंद्र सरकार को बकायदा पत्र लिखकर इसे राज्य में वापस सौंपने की मांग की है।

सिरपुर के लक्ष्मण मंदिर परिसर से वर्ष 1939 में उत्खनन के दौरान मिली यह मूर्ति शिल्पकला का एक बेजोड़ नमूना है, जिस पर इसके शिल्पकार द्रोणादित्य का नाम भी अंकित है। कुख्यात अंतरराष्ट्रीय तस्कर सुभाष कपूर के गिरोह द्वारा रायपुर के इस संग्रहालय से उड़ाई गई इस मूर्ति को अमेरिकी जांच एजेंसियों ने न्यूयॉर्क के एक निजी संग्रह से जब्त कर भारत सरकार को सौंप दिया है। लेकिन, इस अनमोल धरोहर को वापस छत्तीसगढ़ लाने के कानूनी दावों पर अब एक बड़ा प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है। दरअसल, मूर्ति के मालिकाना हक को प्रमाणित करने वाले संग्रहालय के सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज, 'एक्सेशन रजिस्टर' (दाखिला पंजी) को दीमक पूरी तरह चाट गए हैं।
संग्रहालय के प्रभारी क्यूरेटर द्वारा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के संचालक को भेजी गई रिपोर्ट के बाद इस बड़ी लापरवाही का खुलासा हुआ है। सुरक्षित कमरे में रखे होने के बावजूद सुरक्षा मानकों में ढिलाई के कारण इस महत्वपूर्ण रजिस्टर के कई पन्ने नष्ट हो चुके हैं, जिससे मूर्ति के मूल रिकॉर्ड्स और प्रमाणीकरण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि तत्कालीन मध्य प्रदेश के दौर के पुराने रिकॉर्ड्स भोपाल में सुरक्षित हो सकते हैं, जिससे इस डेटा को रिकवर करने की कोशिश की जा रही है। बहरहाल, विश्व संग्रहालय दिवस पर 19 करोड़ की विरासत के मिलने की खुशी के बीच रिकॉर्ड्स के रख-रखाव में हुई यह घोर लापरवाही प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल रही है।







