रायपुर/दुर्ग | छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले में एक बेहद बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की तफ्तीश के बाद अब इस पूरे मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भी एंट्री हो चुकी है। मनी लॉन्ड्रिंग के पुख्ता इनपुट्स के आधार पर ईडी की टीमों ने आज सुबह एक साथ प्रदेश के 5 हाई-प्रोफाइल ठिकानों पर ताबड़तोड़ दबिश दी है।
इस बड़ी कार्रवाई के बाद से ही राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
ED की रडार पर आए ये 5 बड़े चेहरे
प्रवर्तन निदेशालय ने इस बार सीधे उन चेहरों के घरों पर छापा मारा है, जो चयन प्रक्रिया और शासन के शीर्ष पदों पर काबिज थे। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, जिन ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चल रहा है, उनमें शामिल हैं:
टामन सिंह सोनवानी – CGPSC के पूर्व चेयरमैन
जीवन किशोर ध्रुव – CGPSC के पूर्व सचिव
आरती वासनिक – पूर्व परीक्षा नियंत्रक
अमृत खलको – राज्यपाल के पूर्व सचिव (IAS अधिकारी)
भूपेंद्र गनवीर – मुख्य आरोपी ललित गणवीर का भाई
क्यों हुई ED की एंट्री और क्या हैं आरोप?
CGPSC भर्ती परीक्षा (2020-2022) में अपने ही भाई-भतीजों, रसूखदारों और अफसरों के करीबियों को डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे शीर्ष पदों पर अवैध रूप से उपकृत करने के बेहद गंभीर आरोप हैं।
इस मामले में सीबीआई पहले ही चार्जशीट दाखिल कर पूर्व चेयरमैन सहित कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। लेकिन अब ईडी की एंट्री यह साफ दर्शाती है कि इस भर्ती खेल में बड़े पैमाने पर वित्तीय हेरफेर और ब्लैक मनी (Money Laundering) का इस्तेमाल हुआ है। ईडी अब इस बात की कड़ियां जोड़ रही है कि नियमों को ताक पर रखकर दी गई इन 'नौकरियों' के बदले कितने करोड़ रुपयों का लेन-देन हुआ और उस अवैध पैसे को कहां खपाया गया।








