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CGMSC Medicine Quality: क्यूआर कोड से ट्रैक होगी हर गोली,प्रदेश में नई व्यवस्था लागू…

Chhattisgarh 13 November 2025

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रायपुर/(CGMSC Medicine Quality): छत्तीसगढ़ में सरकारी अस्पतालों को सप्लाई हो रही दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। बीते 13 दिनों में जांच के दौरान नौ दवाओं के बैच अमानक पाए गए हैं। इन दवाओं को तत्काल प्रभाव से स्वास्थ्य संस्थानों से वापस मंगाया गया है और उनकी सप्लाई पर रोक लगा दी गई है। तीन दवाओं पर तीन साल के लिए ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई भी की गई है, जबकि संबंधित कंपनियों पर जांच जारी है।

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लगातार मिल रही अमानक दवाओं को देखते हुए छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) ने दवा सप्लाई सिस्टम में बड़ी बदलाव की घोषणा की है। अब राज्य में सरकारी संस्थानों को सप्लाई होने वाली सभी दवाओं की पैकिंग (कार्टन) पर क्यूआर कोड (जीएस-1 सिस्टम) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इस कोड को स्कैन करते ही मोबाइल पर दवा की पूरी जानकारी – जैसे नाम, निर्माण कंपनी, निर्माण तिथि, बैच नंबर, लाइसेंस डिटेल और एक्सपायरी डेट- तुरंत दिखाई देगी।

1,800 दवाओं पर लागू होगा नया सिस्टम:

सीजीएमएससी(CGMSC) के अधिकारियों के अनुसार, यह नई व्यवस्था राज्य में सप्लाई होने वाली करीब 1,800 प्रकार की दवाओं पर लागू की गई है। इसे कॉर्पोरेशन की ई-टेंडर नीति में भी शामिल किया गया है, ताकि भविष्य में किसी भी दवा कंपनी को बिना कोडिंग के टेंडर न मिले। दवा कंपनियों को अपने स्तर पर ही पैकिंग के दौरान कोडिंग का कार्य सुनिश्चित करना होगा।

अधिकारियों का कहना है कि,यह कदम न केवल नकली, अमानक और एक्सपायरी दवाओं की सप्लाई पर रोक लगाएगा, बल्कि दवा वितरण और स्टॉक प्रबंधन में भी पारदर्शिता लाएगा। इसके साथ ही दवा की ट्रैकिंग आसान होगी और किसी शिकायत या जांच की स्थिति में दवा का पूरा इतिहास पता किया जा सकेगा।

मध्य प्रदेश से पहले छत्तीसगढ़ में लागू हुआ जीएस-1 सिस्टम:

सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक रितेश अग्रवाल ने बताया कि,छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है,जिसने मध्य प्रदेश से पहले इस सिस्टम को लागू किया है। उनके अनुसार, “जीएस-1 सिस्टम से सरकारी अस्पतालों में सप्लाई होने वाली दवाओं की ट्रैकिंग आसान होगी और अमानक दवाओं की रोकथाम में यह तकनीक काफी मददगार साबित होगी। यह कदम राज्य के स्वास्थ्य तंत्र को और अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएगा।”

ये दवाएं मिलीं अमानक:

हाल ही में जिन नौ दवाओं के बैच अमानक पाए गए हैं, उनमें शामिल हैं-

• कैल्शियम (एलिमेंटल) विद विटामिन डी-3 टैबलेट

• एलबेंडाजोल टैबलेट

• हेपारिन सोडियम इंजेक्शन

• बैक्लोफेन 10 एमजी टैबलेट

• आयरन सुक्रोज 100 एमजी इंजेक्शन

• मेटफार्मिन 500 एमजी और ग्लाइमपिराइड 2 एमजी सस्टेंड रिलीज टैबलेट

• ओफ्लॉक्सासिन और ओर्निडाजोल टैबलेट।

इन सभी दवाओं की सप्लाई को अस्थायी रूप से रोका गया है। संबंधित कंपनियों से जवाब मांगा गया है और जांच पूरी होने तक नए ऑर्डर पर रोक लगाई गई है।

तीन अस्पताल आयुष्मान योजना से निलंबित:

इसी बीच महासमुंद जिले के तीन निजी अस्पतालों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से तीन माह के लिए बाहर कर दिया गया है। इनमें महासमुंद का महानदी अस्पताल, पिथौरा का सेवा भवन, और सरायपाली का अंबिका अस्पताल शामिल हैं।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव ने बताया कि,इन अस्पतालों द्वारा योजना के नियमों का उल्लंघन किया गया था।

आयुष्मान योजना के तहत पात्र मरीजों को नि:शुल्क इलाज का अधिकार है। यदि कोई अस्पताल आयुष्मान कार्डधारक मरीज का नि:शुल्क इलाज करने से मना करता है, तो उसकी शिकायत टोल फ्री नंबर 104 पर की जा सकती है या मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) और खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) कार्यालय में लिखित रूप में दी जा सकती है।

पारदर्शिता और विश्वसनीयता की दिशा में बड़ा कदम:

राज्य सरकार का यह कदम स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब हर दवा के पैक पर क्यूआर कोड के जरिए उसकी पूरी यात्रा- निर्माण से लेकर वितरण तक – डिजिटल रूप में दर्ज रहेगी। इससे न केवल मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि सरकारी अस्पतालों में दवा वितरण प्रणाली पर भी जनविश्वास मजबूत होगा।

छत्तीसगढ़ सरकार ने नौ दवाओं के अमानक पाए जाने के बाद अब सभी सरकारी दवाओं की पैकिंग पर क्यूआर कोड अनिवार्य किया है। इससे दवाओं की गुणवत्ता जांच, ट्रैकिंग और पारदर्शिता में बड़ा सुधार होगा। साथ ही तीन अस्पतालों को आयुष्मान योजना से निलंबित किया गया है। यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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