छत्तीसगढ़ में एक बार फिर मौसम ने करवट ली है, जिससे तपती गर्मी के बीच लोगों को बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण राज्य के उत्तरी और मध्य हिस्सों में वायुमंडलीय अस्थिरता बनी हुई है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी करते हुए रायपुर, दुर्ग, बस्तर और सरगुजा संभाग के कई जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और ओले पड़ने की चेतावनी दी है।
इस अचानक आए बदलाव से तापमान में 3°C से 6°C तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। अंबिकापुर और जशपुर जैसे क्षेत्रों में न्यूनतम पारा गिरकर 12°C के करीब पहुंच गया है, जिससे सुबह के वक्त हल्की ठंड का अहसास हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाएं फसलों, विशेषकर रबी की गेहूं और चने की कटाई कर रहे किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती हैं। कई इलाकों में ओलावृष्टि से आम की बौर और दलहनी फसलों को भी नुकसान होने की खबर है।
अप्रैल 2026 की शुरुआत भी कुछ इसी तरह के उतार-चढ़ाव भरी रहने वाली है। मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) के अनुसार, अप्रैल के पहले सप्ताह में एक और नया मौसमी सिस्टम सक्रिय होने की संभावना है, जिससे महीने की शुरुआत फिर से बारिश और गरज-चमक के साथ हो सकती है। हालांकि मार्च के अंतिम दिनों में धूप निकलने से गर्मी बढ़ेगी, लेकिन अप्रैल के पहले पखवाड़े में 'प्री-मानसून' गतिविधियों के सक्रिय रहने के कारण लू (Heatwave) का असर फिलहाल कम रहने का अनुमान है।
राजधानी रायपुर में भी आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी और शाम के वक्त हल्की बूंदाबांदी की संभावना है। प्रशासन ने नागरिकों को सलाह दी है कि खराब मौसम के दौरान वे खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास न रुकें। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखें। छत्तीसगढ़ के इस बदलते मिजाज ने सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया है, और आने वाले दिनों में भी सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।








