रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूली छात्रों, पालकों और शिक्षकों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश के सभी शासकीय एवं अशासकीय (निजी) विद्यालयों में आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 का विधिवत संचालन 16 जून 2026 से पूरी तरह शुरू होने जा रहा है। लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ (DPI) ने सोशल मीडिया पर ग्रीष्मकालीन छुट्टियां 30 जून तक बढ़ाए जाने वाले एक पत्र को पूरी तरह से भ्रामक, असत्य और फर्जी करार देते हुए स्पष्ट किया है कि स्कूल अपने तय शेड्यूल के अनुसार 16 जून से ही खुलेंगे।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक कूटरचित (फर्जी) आदेश तेजी से वायरल हो रहा था, जिसमें भीषण गर्मी और हीटवेव का हवाला देकर स्कूलों को 30 जून तक बंद रखने की बात कही गई थी। शरारती तत्वों द्वारा लोक शिक्षण संचालनालय के पुराने आदेश के जावक नंबर और डिजिटल सिग्नेचर को कॉपी करके यह फर्जी पत्र तैयार किया गया था, जिससे पालकों और स्कूल संचालकों के बीच भारी असमंजस की स्थिति बन गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल इस दुष्प्रचार का खंडन किया और स्पष्ट किया कि 20 अप्रैल से शुरू हुआ ग्रीष्मकालीन अवकाश 15 जून को समाप्त हो रहा है। विभाग अब फर्जी पत्र बनाने वाले अज्ञात असामाजिक तत्वों के खिलाफ साइबर सेल के माध्यम से कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है।
'शाला प्रवेश उत्सव' के साथ बच्चों का होगा तिलक लगाकर स्वागत
आधिकारिक निर्देश के अनुसार, 16 जून को स्कूल खुलने के पहले दिन पूरे राज्य में बेहद ही उत्साहपूर्ण माहौल में 'शाला प्रवेश उत्सव 2026' का आयोजन किया जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए इस बार स्कूलों को बच्चों के लिए अधिक आकर्षक, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अनुकूल बनाया जा रहा है। प्रवेश उत्सव के दिन स्कूलों में नए प्रवेश लेने वाले बच्चों का तिलक लगाकर और माला पहनाकर पारंपरिक स्वागत किया जाएगा। इसके साथ ही कक्षा पहली और छठवीं के पात्र छात्र-छात्राओं को पहले ही दिन निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, स्कूल यूनिफॉर्म और साइकिलों का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।
स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह द्वारा जारी विस्तृत गाइडलाइंस के मुताबिक, सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) और प्राचार्यों को 15 जून तक स्कूल परिसरों की बुनियादी साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था और मरम्मत के कार्य अनिवार्य रूप से पूर्ण करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीण और शहरी वार्डों में जागरूकता रैलियां और लाउडस्पीकर के माध्यम से मुनादी कराकर शत-प्रतिशत बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, स्कूल ड्रॉपआउट (पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले) बच्चों को चिन्हित कर उन्हें पुनः मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए इस अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वसहायता समूहों और पालकों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।







